पीएम मोदी का AI को ‘मानव’ बनाने का 5-अक्षरी फॉर्म्युला
‘नई दिल्ली, कुछ लोग (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को भय मानते हैं, भारत इसे भाग्य और भविष्य मानता है।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में दुनियाभर से आए मेहमानों के सामने एआई को लेकर भारत का नजरिया स्पष्ट कर दिया। प्रधानमंत्री ने एआई को बदलाव की बड़ी क्रांति और सकारात्मक शक्ति बताया तो इसके दुरुपोयग पर दुनिया को चेतावनी भी दी। इंडिया में प्रधानमंत्री मोदी ने एआई की उत्तम दशा और दिशा के लिए ‘मानव’ विजन भी प्रस्तुत किया। वहीं, अपने ऑफर्स से दुनियाभर में तहलका मचाने वाली एआई कंपनी एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने एआई का भविष्य तय करने में भारत की बड़ी भूमिका बताई।
AI का उदय मानव इतिहास में निर्णायक मोड़: मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट’ शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के प्रमुख एआई विशेषज्ञों, अनेक देशों के राष्ट्रध्यक्षों, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और उद्योगपतियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मानव इतिहास में कुछ सदी के बाद निर्णायक मोड़ आता है जो सभ्यता की दिशा तय करता है, जिससे सोचने का दृष्टिकोण बदलता है। उन्होंने कहा कि शुरू में उसके प्रभाव का अंदाजा भी नहीं होता लेकिन बाद में यही सभ्यता का आधार बनता है।
उन्होंने प्राचीन इतिहास के कई पड़ावों का उदाहरण देते हुए कहा कि एआई मानव इतिहास में बदलाव की क्रांति है। इससे मशीनों को बुद्धिमान बनाकर मानव सामर्थ्य को बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राचीन पड़ावों की बात करें तो अंतर इतना है कि इस बार बदलाव की तेजी तथा पैमाना अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए हमें विजन और जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी निभानी है।
मैं एआई मॉडल के स्वायत्त व्यवहार, लोगों और सरकारों द्वारा उनके दुरुपयोग की आशंका एवं आर्थिक विस्थापन की संभावना को लेकर चिंतित हूं। इन सवालों और चुनौतियों में भारत की भूमिका अवसरों एवं जोखिमों दोनों ही दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।- डारियो अमोदेई, सीईओ, एंथ्रोपिक
परमाणु ऊर्जा की तरह एआई में विध्वंस और निर्माण, दोनों की क्षमता
मोदी ने कहा कि कई बड़े सवाल हैं जैसे आने वाली पीढ़ियों के हाथों में हम एआई का क्या स्वरूप सौंप कर जाएंगे और इससे भी बड़ा सवाल यह है कि वर्तमान में हम एआई के साथ क्या करते हैं। उन्होंने परमाणु ऊर्जा का उदाहरण देते हुए कहा कि हमने इसका विनाश भी देखा और अब मानवता के लिए इसका सकारातमक योगदान भी देख रहे हैं। ऐसे ही एआई भी सकारात्मक शक्ति है, यदि यह दिशाहीन हुई तो विनाशकारी और इसे सही दिशा मिली तो यह वरदान है।
आज हम एआई को जिस दिशा में लेकर जाएंगे, वैसे ही हमारा भविष्य तय होगा। आज मैं एआई के लिए M A N A V यानी मानव विजन प्रस्तुत करता हूं। मानव का अर्थ होता है ह्यमून।- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत
भारत के लिए आई भय नहीं, भाग्य और भविष्य: मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एआई को ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के दृष्टिकोण से देखता है और यही हमारा मानदंड है। उन्होंने कहा, ‘ध्यान देने की बात यह है कि इंसान एआई के लिए केवल डेटा और कच्चा माल तक सीमित न रह जाए। इसलिए एआई का लोकतांत्रिकरण करना होगा, इसे समानता का माध्यम बनाना होगा, गलोबल साउथ पर विशेष रूप से ध्यान देना होगा।’
एआई को खुली छूट देनी होगी लेकिन निंयत्रण भी हाथ में रखना होगा, जिस दिशा में हम लेकर जायेंगे वैसा ही भविष्य तय होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत को एआई में भाग्य और भविष्य दिखता है। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोगों को नई प्रौद्योगिकी को लेकर संदेह है लेकिन युवा पीढ़ी एआई को जिस तरह अपना रही है, वह अभूतपूर्व है। एआई शिखर सम्मेलन की प्रदर्शनी को लेकर भी यहां जबरदस्त उत्साह रहा है।’
एआई सिस्टम्स उन बीमारियों का इलाज करने में मदद कर सकते हैं जो हजारों वर्षों से लाइलाज रही हैं, मानव स्वास्थ्य में सुधार ला सकते हैं, ‘ग्लोबल साउथ’ सहित अरबों लोगों को गरीबी से बाहर निकाल सकते हैं और ‘सभी के लिए एक बेहतर दुनिया का निर्माण’ कर सकते हैं।- डारियो अमोदेई, सीईओ, एंथ्रोपिक
एआई के लिए पीएम मोदी का ‘मानव’ विजन
मोदी ने एआई के लिए भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए ‘ मानव’ विजन भी प्रस्तुत किया। इसका मतलब एआई के इस्तेमाल का मूल नैतिकतापूर्ण प्रणाली, जवाबदेह शासन, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुगम तथा समावेशी और वैध तथा कानूनी ढांचा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का यह ‘मानव’ विजन 21 वीं सदी में मानवता के कल्याण की अहम कड़ी बनेगा। पीएम ने कहा, ‘आज हम एआई को जिस दिशा में लेकर जाएंगे, वैसे ही हमारा भविष्य तय होगा। आज मैं एआई के लिए M A N A V यानी मानव विजन प्रस्तुत करता हूं। मानव का अर्थ होता है ह्यमून और मानव विजन कहता है-
- M – Moral and ethical system यानी एआई नैतिक मूल्यों पर आधारित हो।
- A – Accountable governance यानी पारदर्शी नियम और कड़ी निगरानी
- N – National sovereignty यानी जिसका डेटा, उसका अधिकार
- A – Accessible and inclusive यानी एआई मोनोपॉली नहीं, मल्टिप्लायर बने।
- V – Valid and legitimate यानी एआई लॉफुल (वैध) और वेरिफाइबल (सत्यापन योग्य) हो।’
विकासशील देशों को मिले एआई की पहुंच
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई तक सबकी पहुंच सुनिश्चित होनी चाहिए और इसे खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए समावेशिता तथा सशक्तीकरण का साधन बनाया जाना चाहिए। ‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, अल्प विकसित अथवा अविकसित माना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया एवं लातिन अमेरिका में स्थित हैं।
एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने भी अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ के लिए भारत की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एक मानक स्थापित किया है और ‘ग्लोबल साउथ’ के माध्यम से प्रौद्योगिकी एवं मानवीय लाभों के प्रसार में मदद की है।
एआई से जुड़ी नौतियों के बीच भारत की भूमिका महत्वपूर्ण: एंथ्रोपिक सीईओ
भारत मंडपम में एंथ्रोपिक सीईओ ने कहा कि एआई मॉडल के स्वायत्त व्यवहार, लोगों तथा सरकारों के इसका दुरुपयोग करने की आशंका और आर्थिक विस्थापन की क्षमता से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अमोदेई ने 2023 में ‘ब्लेचली पार्क’ में शुरू हुए वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन के बाद से इस चौथे सम्मेलन पर कहा कि पिछले कुछ वर्ष में कृत्रिम मेधा में हुई प्रगति ‘बेहद आश्चर्यजनक’ रही है।
एआई पर एंथ्रोपिक सीईओ ने जताई यह चिंता
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी की तीव्र प्रगति के साथ-साथ, एआई को व्यावसायिक रूप से अपनाने को लेकर इससे जुड़े सामाजिक एवं नैतिक प्रश्न भी तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। उन्होंने एआई प्रणालियों के स्वायत्त व्यवहार, लोगों और सरकारों द्वारा उनके संभावित दुरुपयोग एवं आर्थिक विस्थापन की संभावना सहित गंभीर जोखिमों का भी उल्लेख किया। अमोदेई ने कहा, ‘जोखिमों की बात करें तो मैं एआई मॉडल के स्वायत्त व्यवहार, लोगों और सरकारों द्वारा उनके दुरुपयोग की आशंका एवं आर्थिक विस्थापन की संभावना को लेकर चिंतित हूं। इन सवालों और चुनौतियों में भारत की भूमिका अवसरों एवं जोखिमों दोनों ही दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।’
एआई से खुलेंगे मानव कल्याण के बड़े द्वार: अमोदेई
अवसरों की बात करते हुए अमोदेई ने कहा कि एआई करीब एक दशक से तेजी से विकास कर रहा है। कुछ ही वर्ष में एआई मॉडल, अधिकतर कार्यों में मनुष्यों की संज्ञानात्मक क्षमताओं को पार कर जाएंगे। अमोदेई ने कहा कि ऐसी प्रणालियां उन बीमारियों का इलाज करने में मदद कर सकती हैं जो हजारों वर्षों से लाइलाज रही हैं, मानव स्वास्थ्य में सुधार ला सकती हैं, ‘ग्लोबल साउथ’ सहित अरबों लोगों को गरीबी से बाहर निकाल सकती हैं और ‘सभी के लिए एक बेहतर दुनिया का निर्माण’ कर सकती हैं।
एआई समिट में पहुंचे दुनियाभर के दिग्गज
भारत मंडपम में आयोजित शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले दुनियाभर के नेताओं में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेई प्लेनकोविक, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो शामिल हैं। वहीं, सुंदर पिचाई, सैम अल्टमैन समेत दुनियाभर की टेक कंपनियों के बड़े चेहरे इस सम्मेलन में शामिल हैं।
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