राष्ट्रपति लूला की भारत यात्रा : हासिल और निहितार्थ

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की हालिया चार-दिवसीय भारत यात्रा वैश्विक कूटनीति की एक महत्वपूर्ण घटना साबित हुई। यह यात्रा न केवल दो उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बीच रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम बनी, बल्कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ के देशों की एकजुटता का संदेश भी दे गई। लूला अपने सबसे बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए।

14 मंत्री और 300 से अधिक सीईओ! दरअसल, यह यात्रा भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाली सिद्ध हुई। व्यापार, प्रौद्योगिकी और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। सरल शब्दों में कहें तो दोनों देशों के लिए आर्थिक विकास और भू-राजनीतिक मजबूती का नया द्वार खुला। यात्रा की शुरुआत दिल्ली में भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से हुई। यह समिट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभाव पर केंद्रित था।

व्यापार, निवेश और ऊर्जा में भारत-ब्राजील सहयोग बढ़ाने पर सहमति

इसमें राष्ट्रपति लूला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ भाग लिया। दोनों नेताओं ने एआई को डिजिटल उपनिवेशवाद से बचाने की जरूरत पर जोर दिया। लूला ने भारत की डिजिटल प्रगति की सराहना की और कहा कि एआई का उपयोग विकासशील देशों के हित में होना चाहिए। 21 फरवरी को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति लूला का राजकीय स्वागत किया। दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। याद रहे, यह यात्रा ऐसे समय हुई जब अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीतियाँ दोनों देशों को प्रभावित कर रही हैं और वैकल्पिक साझेदारियाँ खोजना अहम हो गया है।

यात्रा के मुख्य हासिलों की बात करें तो कुल 10 समझौते हुए, जो दोनों देशों के रिश्तों को ठोस आधार देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण रहा दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम) पर सहयोग, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित ऊर्जा के लिए जरूरी हैं। ब्राजील के पास इन खनिजों के विशाल भंडार हैं, जबकि भारत की प्रोसेसिंग तकनीक उन्हें उपयोगी बना सकती है। इसके अलावा, डिजिटल साझेदारी पर एक संयुक्त घोषणा हुई, जिसमें एआई, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

यह भी पढ़ें… भारत-चीन निकटता बनाम चीन-पाक समीकरण

टीकेडीएल, स्वास्थ्य और एमएसएमई में भारत-ब्राजील सहयोग

पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (टीकेडीएल) पर समझौता, स्वास्थ्य नियामकों के बीच सहयोग, एमएसएमई और उद्यमिता में सहयोग, डाक क्षेत्र में समझौता और स्टील सप्लाई चेन के लिए खनन सहयोग जैसे समझौते भी हुए। भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए ब्राजील का बिजनेस वीजा 10 साल तक बढ़ाया गया, जो व्यापार को आसान बनाएगा। साथ ही, शिक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी का समझौता हुआ। दोनों देशों ने गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने का निर्देश दिया, जो व्यापार को सुगम बनाएगा।

इन हासिलों के निहितार्थ गहरे और दूरगामी हैं। भू-राजनीतिक नज़रिये से, यह यात्रा चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक कदम है, क्योंकि महत्वपूर्ण खनिजों में चीन का वर्चस्व है। भारत और ब्राजील मिलकर वैश्विक सप्लाई चेन को विविधता देंगे, जो अमेरिकी टैरिफ जैसे झटकों से बचाव करेगा। वैश्विक संदर्भ में, दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुधार, खासकर सुरक्षा परिषद में विस्तार की माँग की और आतंकवाद के खिलाफ मजबूत प्रतिबद्धता जताई। यह ग्लोबल साउथ की एकजुटता का संकेत है, जहाँ विकासशील देश अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

आर्थिक रूप से, यह यात्रा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने वाली रही। ब्राजील को भारत से निवेश मिलेगा, जबकि भारत को कृषि, विमानन और फार्मा में अवसर। पर्यावरण के लिहाज से, जलवायु कार्रवाई और नवीकरणीय ऊर्जा पर सहयोग से वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, इस यात्रा ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग का नया मॉडल पेश किया, और संदेश दिया कि उभरते देश मिलकर विकसित दुनिया की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button