एचआईवी रोकथाम प्रयासों का केंद्र बिंदु हैं प्राथमिकता प्राप्त जिले : डॉ. राकेश गुप्ता

हैदराबाद, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा हैदराबाद में सुरक्षा संकल्प कार्यशाला का आयोजन किया गया। नाको के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक डॉ.राकेश गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय एचआईवी नियंत्रण लक्ष्यों की दिशा में प्रगति में उल्लेखनीय तेजी आने और एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता पर बल दिया गया।

हैदराबाद में नाको सुरक्षा संकल्प कार्यशाला का आयोजन

यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन द्वारा मिशन एड्स सुरक्षा के तहत जिला स्तरीय एचआईवी प्रतिक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से सुरक्षा संकल्प कार्यशाला का आयोजन किया गया। साथ ही इस कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय, राज्य और जिला नेतृत्व को एक साथ एक मंच पर लाना तथा परस्पर समन्वय को सक्षम बनाना था। ताकि राज्य के प्राथमिकता वाले जिलों में लक्षित हस्तक्षेपों को गति प्रदान की जा सके।

जानकारी देते हुए कहा गया कि राष्ट्रीय एचआईवी प्रतिक्रिया में तेलंगाना प्रमुख फोकस राज्य है। यहां वयस्कों में एचआईवी का प्रसार 0.41% है और अनुमानित रूप से 1,56,961 लोग एचआईवी से पीड़ित हैं। तेलंगाना राज्य में 19 प्राथमिकता वाले जिले हैं, जिन्हें गहन कार्यक्रम कार्यान्वयन और निगरानी के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें हैदराबाद, रंगारेड्डी, खम्मम, करीमनगर, नलगोंडा, सिद्दीपेट, मेदक, वारंगल, निजामाबाद, आदिलाबाद, सूर्यापेट, पेद्दापल्ली, जनगांव, विकाराबाद, कामारेड्डी, हनमकोंडा,संगारेड्डी, महबूबाबाद तथा जयशंकर भूपलपल्ली का नाम शामिल है।

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जिला स्तर पर प्रभावी योजना, निगरानी तथा जवाबदेही की आवश्यक

डॉ.राकेश गुप्ता ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि प्राथमिकता प्राप्त जिले भारत के एचआईवी रोकथाम प्रयासों का केंद्र बिंदु हैं। यानी प्राथमिकता वाले जिले भारत में एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर केंद्रित डेटा-आधारित हस्तक्षेप बेहतर परिणाम प्राप्त करने और राष्ट्रीय लक्ष्यों की ओर प्रगति को गति देने के लिए महत्वपूर्ण हैं। अवसर पर डॉ.राकेश गुप्ता ने प्रभावी कार्यक्रम कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर प्रभावी योजना, सतत निगरानी और जवाबदेही की आवश्यकता पर भी विशेष रूप से बल दिया।

कार्यशाला की चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य डेटा-आधारित कार्य योजनाओं को विकसित करना, एचआईवी रोकथाम और परीक्षण सेवाओं तक पहुंच में सुधार करना, उपचार से जुड़ाव और उपचार में निरंतरता को मजबूत करना और एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करना था। यहां हुए विचार-विमर्श के दौरान एचआईवी रोकथाम रणनीतियों को मजबूत करने, परीक्षण सेवाओं तक पहुंच बढाने, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी से जुड़ाव और उसे जारी रखने में सुधार करने आदि के साथ-साथ कमजोर एवं प्रमुख आबादी के बीच लक्षित हस्तक्षेपों को विस्तारित करने पर पर ध्यान केंद्रित किया गया। जिला टीमों ने कार्यक्रम के प्रदर्शन पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करते हुए परिचालन और जमीनी स्तर की चुनौतियों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में तेलंगाना राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की परियोजना निदेशक डॉ. एस. संगीता सत्यनारायण, जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, राज्य के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी, जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला एड्स नियंत्रण अधिकारियों सहित अन्य हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

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