जन विश्वास विधेयक लोकसभा में पारित

नई दिल्ली, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि जन विश्वास विधेयक का उद्देश्य भरोसे की एक संस्कृति बनाना है और विश्वास की संस्कृति भय के आधार पर नहीं, बल्कि कर्तव्य के आधार पर बनेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित कानून को इसी सोच के साथ लाया जा रहा है।

गोयल ने जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक-2026 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून में सबसे बड़ा यह प्रावधान किया गया है कि यह आपको सुधरने का मौका देता है। प्रस्तावित कानून में देश के कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाने के लिए छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने के वास्ते 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है।

गोयल के जवाब के बाद, सदन ने कांग्रेस सांसद के. काव्या सहित कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी। मंत्री ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनमें छोटी-मोटी गलती होने पर पहले चेतावनी दी जाएगी। दूसरी बार, गलती की तो दंड लगेगा और फिर यदि कुछ और गंभीर गलती करते हैं, तो तीसरी बार दंड बढ़ जाएगा और अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।

विकसित भारत बनाने के लिए हम सब तत्पर

मंत्री ने कहा कि इसे चरणबद्ध कार्रवाई कहा जाता है और इससे व्यक्ति को सुधरने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विश्वास की एक संस्कृति बनाना है, कल्चर ऑफ ट्रस्ट जो भय के आधार पर नहीं, बल्कि कर्तव्य के आधार पर हो। इस (प्रस्तावित) कानून को इसी सोच के साथ लाया गया है।

गोयल ने कहा कि यह प्रस्तावित कानून दर्शाता है कि इस कर्तव्य भावना के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत बनाने के लिए हम सब तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि दंड देने वाली गुलामी की जो मानसिकता थी, उसे न्याय में कैसे बदला जाए।

नकली दवाओं से संबंधित प्रावधानों को हल्का करने से जुड़े कुछ सदस्यों की आशंका को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि इन दवाओं के भंडारण, बिक्री, आयात या निर्माण के लिए सजा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गोयल ने कहा कि एक संशोधन ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में लाया गया है। अगर कोई व्यक्ति गलत दवाई बेचता है, रखता है, आयात करता है, वितरण करता है या नकली दवाई रखता या बेचता है तो प्रावधान में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

छोटे अपराधों पर सजा में राहत

उस पर जुर्माना या दंड पहले जैसा ही रखा गया है। उन्होंने कहा कि हमने सिर्फ इतना किया कि किसी के पास आयुष, होम्योपैथिक दवा मिल जाए, तो जिसने बनाते वक्त उस पर अपना नाम नहीं लिखा, उस पर कार्रवाई हो। छोटे-मोटे दुकानदारों पर कार्रवाई करने से क्या फायदा होगा?

गोयल ने कहा कि हमने केवल प्रक्रियात्मक खामियों से संबंधित प्रावधानों को सरल बनाया है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों के लिए गहन विचार-विमर्श किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि जानबूझ कर की गई गलती, या किसी दूसरे को कोई नुकसान पहुँचाने वाली गलती को छोड़कर छोटे-मोटे अपराध में दंड से निजात दिलाई जाए।(भाषा) 

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button