संक्रामक रोगों की त्वरित रिपोर्टिंग और कार्रवाई ज़रूरी : कर्णन
हैदराबाद, ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम आयुक्त आर.वी. कर्णन ने कहा कि जलजनित बीमारियों और उभरते सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों से फैलने वाली बीमारियों पर नियंत्रण के लिए वन हेल्थ दृष्टिकोण अनिवार्य है। साथ ही उनकी त्वरित रिपोर्टिंग, सत्यापन और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है।
जीएचएमसी आयुक्त बेंगलुरू और ठाणे के एमएसयू अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। जीएचएमसी ने जुबिली हिल्स स्थित डॉ. एमसीआर मानव संसाधन विकास संस्थान में महानगरीय निगरानी इकाई (एएसयू) के माध्यम से हैदराबाद, बेंगलुरू और ठाणे के कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय संयुक्त इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की। उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर.वी. कर्णन ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा में एमएसयू की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
एमएसयू कर्मियों की मुख्य जिम्मेदारी रोग फैलने की आशंका वाले मामलों की समय पर रिपोर्टिंग, सत्यापन और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जलजनित बीमारियों जैसे तीव्र दस्त रोग, हैजा और वायरल हेपेटाइटिस, कीटजनित बीमारियों जैसे डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया तथा अन्य उभरते सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों जैसे फूड पॉइजनिंग और पशुओं से फैलने वाली बीमारियों के बारे में कर्मचारियों को सजग करना है।
यह सब वन हेल्थ दृष्टिकोण के तहत किया जा रहा है। उन्होंने झुग्गी बस्तियों, घनी आबादी वाले इलाकों और प्रवासी बस्तियों में रहने वाले कमजोर वर्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वहाँ रोग फैलने का खतरा अधिक रहता है। कर्णन ने कहा कि यह इकाई जीएचएमसी द्वारा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत स्थापित की गई है, जो शहरी रोग निगरानी का एक प्रमुख केंद्र बन रही है।
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एमएसयू में 14 पद भरे, शेष पर जल्द होगी भर्ती
स्वीकृत 17 पदों में से 14 पर भर्ती हो चुकी है, शेष पद जल्द भरे जाएँगे। नए कर्मचारियों को विभागीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नारायणगुड़ा स्थित प्रिवेंटिव मेडिसिन संस्थान में प्रयोगशाला सेवाएँ शुरू की गयी हैं और बायोसेफ्टी लेवल 2 उपकरणों की खरीद से इन्हें और मजबूत किया जा रहा है। हरिहर कला भवन में कमांड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जा रहा है, जो रोग निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया को और बेहतर बनाएगा। उन्होंने कहा कि हैदराबाद में डेंगू की रियल टाइम निगरानी, जीआईएच मैपिंग और फील्ड स्तर पर समन्वित कार्रवाई के लिए विशेष वेक्टर बॉर्न डिजीज ऐप का उपयोग किया जा रहा है, जिससे साक्ष्य आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य निर्णय लिए जा रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके माध्यम से एस, पी और एल फॉर्म द्वारा रियल टाइम रोग रिपोर्टिंग और ईवेंट आधारित निगरानी की जाएगी। इसके अलावा महामारी जाँच, प्रकोप से जुड़े केस स्टडी, डेटा सुरक्षा, जोखिम संचार, सामुदायिक सहभागिता और सार्वजनिक स्वास्थ्य कानूनों पर सत्र होंगे। आयुक्त ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का उपयोग आपसी समन्वय और पेशेवर नेटवर्क मजबूत करने के लिए करने का आग्रह करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, स्वच्छता, पशुपालन और पर्यावरण प्रबंधन जैसे कई विभाग शामिल होते हैं। कार्यक्रम में अतिरिक्त आयुक्त हेमंता केशव पाटिल, रघु प्रसाद, जोनल आयुक्त प्रियंका आला, संयुक्त निदेशक डॉ. शुभांगी कुलसांगे, डॉ. प्रदीप आवाटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मजा तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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