हैदराबाद मेट्रो रेल के अधिग्रहण पर प्रस्ताव पारित

हैदराबाद, राज्य विधानसभा में आज राज्य सरकार द्वारा मेट्रो रेल के अधिग्रहण पर प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव को चर्चा के बिना पारित करने पर भारास के पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने कड़ी आपत्ति जताई।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने आज एलएण्डटी से राज्य सरकार द्वारा मेट्रो रेल अधिग्रहण करने के राज्य सरकार के निर्णय का उल्लेख करते हुए प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पेश करते हुए उन्होंने कहा कि हैदराबाद में बढ़ते हुए ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए हैदराबाद मेट्रो रेल प्रॉजेक्ट शुरू किया गया था।
राज्य सरकार द्वारा अध्ययन करने के बाद मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृति देते हुए अधिग्रहण किया गया। उन्होंने पेश किए गए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित करने का आग्रह किया। पैनल स्पीकर द्वारा प्रस्ताव को सदन में पेश करने की घोषणा करते ही मुख्यमंत्री ने इसे सर्वसम्मति से पारित करने पर आभार जताया।
इस दौरान हरीश राव ने हस्तक्षेप कर कहा कि प्रस्ताव को चर्चा के बिना पारित करना सर्वसम्मति नहीं, बल्कि एकपक्षीय सहमति है। प्रस्ताव पर चर्चा के माध्यम से सदन के सदस्यों की राय न लेना अनुचित है। उन्होंने चर्चा के बिना प्रस्ताव पारित करने पर कड़ी आपत्ति जताई।
अवधि को कुल 60 वर्ष तक अर्थात जुलाई-2072 तक बढ़ा दिया गया
इसके पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से विधाई मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने मेट्रो रेल के अधिग्रहण पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि मेट्रो रेल प्रॉजेक्ट की शुरुआत फेस-1 के तहत सितंबर-2010 में एलएण्डटी के साथ 69 किलोमीटर की लम्बाई वाले तीन कॉरिडोर के तहत समझौते के आधार पर की गई थी। पहला कॉरिडोर मियाँपुर से एल.बी. नगर 29 किलोमीटर, दूसरा कॉरिडोर जुबली बस स्टेशन से एमजीबीएस 11 किलोमीटर और तीसरा कॉरिडोर नागोल से रायदुर्ग 29 किलोमीटर के रूप में प्रारंभ किया गया था।
केंद्र सरकार से एलएण्डटी संस्था ने 1,458 करोड़ रुपये वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) माँगा था, जो कुल प्रॉजेक्ट का 12 प्रतिशत था, जबकि 40 प्रतिशत तक वीजीएफ की अनुमति थी। इस प्रॉजेक्ट में रियायत की अवधि 25 वर्ष थी, जिसे 5 जुलाई, 2012 से प्रारंभ कर और 25 साल तक बढ़ाया जा सकता था। मेट्रो प्रॉजेक्ट का संचालन नवंबर 2017 से फरवरी 2020 के बीच अलग-अलग चरणों में शुरू हुआ। इसके बाद पिछली सरकार ने जुलाई-2022 में एलएण्डटी के साथ एक पूर्व रियायत समझौता किया। इसके तहत रियायत की अवधि को कुल 60 वर्ष तक अर्थात जुलाई-2072 तक बढ़ा दिया गया।
श्रीधर बाबू ने बताया कि पिछली सरकार ने एलएण्डटी को तीन हजार करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने का आश्वासन दिया था। शहर के लगातार विस्तार के बावजूद मेट्रो नेटवर्क के और विस्तार का काम हाथ में नहीं लिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि हैदराबाद जो कभी मेट्रो रेल नेटवर्क की लम्बाई के मामले में देशभर में दूसरे स्थान पर था, जो फिसलकर 9वें स्थान पर आ गया।
फेस-1 को मिले अच्छे प्रोत्साहन और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की बढ़ती मांग को देखते हुए वर्तमान सरकार ने 11 नवंबर, 2024 और 20 जून, 2025 को भारास सरकार को दूसरे चरण (ए) के तहत 76.4 किलोमीटर के पाँच कॉरिडोर, नागोल से शमशाबाद एयरपोर्ट 36.8 किलोमीटर, रायदुर्ग से कोकापेट 11.6 किलोमीटर, एमजीबी एस से चंद्रायनगुट्टा 7.5 किलोमीटर, मियाँपुर से पटनचेरु 13.4 किलोमीटर और एल. बी. नगर से हयातनगर 7.1 किलोमीटर के प्रस्ताव पेश किए। इनकी अनुमानित लाग 24,269 करोड़ रुपये है। साथ ही फेस-2 (बी) के तहत 86.1 किलोमीटर के तीन कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए, जिसमें एयरपोर्ट से भारत फ्यूचर सिटी 39.6 किलोमीटर, जेबीएस से मेडवल 24.5 किलोमीटर और जेबीएस से शामीरपेट 22 किलोमीटर शामिल है, जिनकी अनुमानित लागत 19,579 करोड़ है।
15 हजार रुपये का भुगतान कर अधिग्रहण किया जाएगा
इन प्रस्तावों को केंद्र सरकार से राज्य सरकार के बीच संयुक्त उपक्रम के तहत मंजूरी देने के लिए भेजा गया है। उन्होंने बताया कि द्वितीय चरण के प्रस्तावों की स्थिति और भारत सरकार से मंजूरी में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार के पास उपलब्ध विकल्पों को 16 अक्तूबर, 2025 को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक के समक्ष पेश कर विचार-विमर्श के बाद सचिवों की समिति का गठन करते हुए मुख्य सचिव को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
इस समिति में आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने भी भारत सरकार की ओर से समिति सदस्य के रूप में यूपीएमआरसीएल के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार को नामित किया है। उन्होंने बताया कि गत 23 मार्च को संपन्न मंत्रिमंडल की बैठक में मेट्रो रेल का राज्य सरकार द्वारा अधिक्रक्षण करने को मंजूरी दे दी गई।
इसके लिए ऋण और इक्विटी समेत एलएण्डटी मेट्रो रेल हैदराबाद लिमिटेड को 15 हजार रुपये का भुगतान कर अधिग्रहण किया जाएगा। इसके संबंध में आगामी 30 अप्रैल तक कानूनी कार्रवाई को पूर्ण कर लिया जाएगा। उनि सदन से राज्य सरकार के इस निर्णय का समर्थन करने की अपील की।
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