भारत का विश्वगुरु बनना दुनिया की आवश्यकता, आरएसएस सरसंचालक मोहन भागवत ने किया आह्वान

हैदराबाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंचालक डॉ. मोहन भागवत ने भारत को विश्वगुरु बनाने को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। कान्हा शांतिवनम में दिल्ली आधारित एनजीओ विश्व निकेतन द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय विश्व संघ शिविर को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि विश्वगुरु बनना हमारी महत्वाकांक्षा नहीं है, बल्कि यह दुनिया की आवश्यकता है। हिंदू और भारतीय सभ्यता ने ही हजारों सालों तक दुनिया का मार्गदर्शन किया।

वे दुनिया भर में गए लेकिन किसी का धर्म नहीं बदला। किसी को जीता नहीं, बल्कि जो जैसे थे, उनको उसी स्थिति में अच्छे जीवन और आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। भागवत ने कहा कि दुनिया के देश खूब ताकत लगा चुके हैं लेकिन जहां तक वे पहुंचना चाहते थे, नहीं पहुंच पाए हैं। सिर्फ भारत की ऐसा कर सकता है। इसलिए भारत का विश्वगुरु बनना एक वैश्विक आवश्यकता है।

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भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए संघ और अन्य धाराओं का प्रयास जारी

मोहन भागवत ने कहा कि विश्वगुरु ऐसे नहीं बना जाता है। उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि अनेक धाराओं से यह मेहनत चल रही है। उसमें एक धारा संघ की है। व्यक्ति निर्माण उसमें एक है। उन्होंने कहा कि संघ के लोग व्यक्ति निर्माण करते हैं और समाज में परिर्वतन खड़ा करने वाले व्यक्ति को तरह-तरह कार्य करने के लिए भेजते हैं। भागवत ने कहा कि आज उनके कामों की तारीफ होती है। उनके कामों को समाज का विश्वास मिलता है। उन्होंने कहा कि यह हमारा देश है। यह हमारा समाज है। ये हमारा धर्म है। एक कर्तव्य लेकर समाज का जन्म हुआ है। इसलिए व्यक्ति और समाज तैयार हो। परिवार तैयार हो। हम तैयार हों। ऐसा करने के बाद सारी दुनिया को ज्ञान के विस्तार में नीति के साथ आगे बढ़ने का रास्ता दे सकें। यह हमारा लक्ष्य है।

भागवत ने कहा कि वह समय अब आ गया है। 100 साल पहले जब योगी अरविंद ने घोषणा की थी कि सनातन धर्म का पुनरुत्थान भगवान की इच्छा है और हिंदू राष्ट्र का उदय सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए है। भारत या हिंदू राष्ट्र और सनातन धर्म व हिंदुत्व ये सब एक ही हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब हमें उस प्रक्रिया को जारी रखना है। हम देख रहे हैं कि भारत में संघ के प्रयास और अपने-अपने देशों में हिंदू स्वयंसेवक संघों के प्रयास एक जैसे हैं, यानी हिंदू समुदाय को संगठित करना। पूरी दुनिया में धार्मिक जीवन जीने वाले समाज का उदाहरण पेश करना, धार्मिक जीवन जीने वाले लोगों के लिए उदाहरण पेश करना।

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