कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर विशेष ध्यान : तुम्मला नागेश्वर राव
हैदराबाद, तेलंगाना चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री फेडरेशन (एफटीसीसीआई) द्वारा विदेश व्यापार महानिदेशालय तथा कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से तेलंगाना से खाद्य एवं कृषि उत्पादों में उभरते निर्यात अवसर – मुक्त व्यापार समझौतों का प्रभाव विषयक सेमिनार का आयोजन किया गया।
रेड हिल्स स्थित फेडरेशन हाउस में आयोजित कार्यक्रम में सरकारी एजेंसियों, उद्योग निकायों, निर्यातकों तथा किसानों के बीच सहयोग पर विशेष बल दिया गया, ताकि तेलंगाना को कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके। तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने सेमिनार का उद्घाटन करते हुए पिछले कुछ वर्षों में तेलंगाना के कृषि क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य देश में धान का अग्रणी उत्पादक बनकर उभरा है।
हमारी अगली प्राथमिकता निर्यात, मूल्यवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों को बेहतर मूल्य प्रदान करना है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में राज्य सरकार खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना और कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अपने संबोधन में उन्होंने तेलंगाना के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने के लिए ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुपालन को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने खम्मम जिले के बुग्गापाडु में स्थापित किए जा रहे मेगा फूड पार्क जैसी पहलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएँ, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स सहायता तथा मूल्यवर्धन के अवसर प्राप्त होंगे।
बेहतर सप्लाई चेन और कोल्ड स्टोरेज पर जोर
तुम्मला नागेश्वर राव ने अवसर पर तेलंगाना के बागवानी क्षेत्र की निर्यात क्षमता पर भी प्रकाश डाला, जिसमें फल तथा सब्जियों के साथ-साथ हल्दी एवं मिर्च समेत मसाले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर आपूर्ति श्रृंखलाओं, पैकेजिंग केंद्रों, कोल्ड स्टोरेज अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के साथ यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर भी विशेष रूप से बल दिया कि कृषि निर्यात को बढ़ावा देते समय विशेष रूप से कृषि उत्पादों को प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और टैरिफ नीतियों के संदर्भ में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।
एफटीसीसीआई के अध्यक्ष आर. रवि कुमार ने स्वागत वक्तव्य देते हुए भारत के कृषि निर्यात परिदृश्य में तेलंगाना की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य प्रतिवर्ष लगभग 168 लाख मीट्रिक टन चावल का उत्पादन करता है। इसके अलावा मसालों, फलों, सब्जियों तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में इसकी प्रभावी क्षमता है। उन्होंने निर्यातकों को सहयोग देने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पैकेजिंग हाउस, एकीकृत कोल्ड चेन सिस्टम, खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क सहित निर्यात अवसंरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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किसानों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने पर जोर
रवि कुमार ने किसानों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने के लिए निर्यात उन्मुख किसान उत्पादक संगठन समूहों के निर्माण के महत्व को भी रेखांकित किया। आर. रवि कुमार ने अवसर पर सरकार से तेलंगाना में बढ़ते खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देने के लिए एकीकृत कृषि निर्यात प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स जोन के विकास पर विचार करने का भी अनुरोध किया।
विदेश व्यापार महानिदेशालय के संयुक्त महानिदेशक अक्षय एससी तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय प्रमुख और आर.पी. नायुडू ने सम्मेलन में भारत की व्यापार रणनीति, निर्यात प्रक्रिया, बाजार पहुंच, गुणवत्ता मानकों और कृषि निर्यातकों के लिए उपलब्ध सहायता तंत्रों पर आधारित तकनीकी प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौता दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं पर टैरिफ यानि आयात शुल्क तथा व्यापार बाधाओं को कम करने या समाप्त करने के लिए किया गया व्यापार समझौता है। इसका लक्ष्य भागीदार देशों के बीच व्यापार को आसान, सस्ता और तीव्र बनाना है।
एपीईडीए के तहत 700 से अधिक उत्पादों को निर्यात प्रोत्साहन
नायुडू ने कहा कि एपीईडीए अपने निर्यात प्रोत्साहन जनादेश के अंतर्गत लगभग 700 से अधिक कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को शामिल करता है। एपीईडीए द्वारा प्रोत्साहित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 2.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। एपीईडीए द्वारा सुगम बनाए गए गैर-बासमती चावल का निर्यात पिछले वर्ष लगभग 55,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि निज़ामाबाद एक महत्वपूर्ण चावल प्रसंस्करण केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है, जहां कई चावल मिलों को संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात के लिए मंजूरी मिल चुकी है।
एफटीसीसीआई कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण समिति के अध्यक्ष एस. चंद्रमोहन ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य निर्यात के अवसरों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार रुझानों और कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों के लिए मुक्त व्यापार समझौतों के निहितार्थों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था। सेमिनार के दौरान तेलंगाना से निर्यात वित्त, गुणवत्ता और अनुपालन आवश्यकताओं और उत्पाद-विशिष्ट निर्यात अवसरों पर पैनल चर्चा के साथ-साथ कृषि निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सरकारी समर्थन की भूमिका पर भी चर्चा की गई।
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