नाम बड़े दर्शन छोटे का प्रतीक बनता जा रहा खेल प्राधिकरण

हैदराबद, वर्ष 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने कहा था कि केंद्र से जारी एक रुपया लाभार्थियों तक पहुँचने तक 15 पैसे ही रह जाता है। यानि 85 पैसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। कुछ यही हाल दिख रहा है खेल के मामले में। भविष्य की खेल प्रतिभाओं को तरासने के लिए सरकार ने सीएम कप के नाम पर 38.50 करोड़ जारी किए, लेकिन जमीनी स्तर पर यह पैसा दिखाई नहीं दे रहा है। इस कप के लिए ज़िलों से आए बच्चों को न ढंग का खाना मिल रहा है और न ही आराम के ढंग का बिस्तर।

स्थिति यह है कि बच्चों को दाल-चावल परोसा जा रहा है और सोने के लिए जमीन पर गद्दे डाल दिए गए हैं, जिस पर न बेडशीट है और न सिर टिकाने के लिए तकिया। प्रश्न यह उठ खड़ा हुआ है कि करोड़ों का फंड कहाँ जा रहा है? तेलंगाना के युवा मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का रुझान खेलों के प्रति उभरकर आ रहा है और वे विशेषकर खेलों में युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वे स्वयं भी अपने विद्यार्थी जीवन में खिलाड़ी रह चुके हैं। उनका उद्देश्य तेलंगाना को खेल के क्षेत्र में वैश्विक रूप से उभारना है।

ग्रामीण क्षेत्रों की छुपी खेल प्रतिभाओं को उभारने हेतु सीएम कप

किसी न किसी रूप में वे खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने से पीछे नहीं हटते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा से तेलंगाना का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार के अलावा आवास भूमि उपलब्ध करवाने के कई उदाहरण रेवंत रेड्डी ने पेश किए हैं। इसी श्रृंखला में तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों में छुपी खेल प्रतिभाओं को उभारने के उद्देश्य से सीएम कप का आयोजन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

यहाँ पर मुख्यमंत्री का उद्देश्य तो साफ उभरकर आ रहा है, लेकिन सीएम कप का सारा दारोमदार तेलंगाना खेल प्राधिकरण के कंधों पर डाला गया है। लेकिन प्राधिकरण आयोजन को लेकर कड़ी आलोचनाओं का शिकार हो रहा है। यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है और न ही ऐसा कार्यक्रम है, जिसका कोई उद्देश्य न हो, जिस उद्देश्य के साथ सीएम कप का आयोजन किया जा रहा है, वह आयोजन को लेकर नजर नहीं आ रहा है। खिलाड़ियों से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर तेलंगाना का गौरव बढ़ाने की आकांक्षा की जा रही है, लेकिन आयोजन का जो स्तर है, उसे देखकर उद्देश्य प्राप्ति की संभावना कहीं पर भी नजर नहीं आ रही है।

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राज्य स्तर पर 42 हजार से अधिक खिलाड़ियों की दयनीय स्थिति

राज्य स्तर पर आयोजित इस खेल स्पर्धा में भाग लेने के लिए राज्य भर से आए लगभग 42 हजार से अधिक खिलाड़ियों की स्थिति काफी दयनीय नजर आ रही है। इसे समन्वय का अभाव कहा जाए या प्राधिकरण की लापरवाही, इसका खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। 44 प्रकार की खेल स्पर्धाओं में भाग लेने के लिए आए खिलाड़ियों को पहले दिन से ही असुविधाओं और मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। जो सुविधाएँ दी जा रही हैं, वह भी नाम मात्र की और निम्न स्तरीय हैं। हालात यह है कि खिलाड़ियों को आवास की सुविधा कोचिंग सेंटरों में केवल गद्दे बिछाकर दी जा रही है। खिलाड़ियों के लिए कोचिंग सेंटर के शौचालयों पर ताले लगा दिए गए। भोजन के रूप में केवल दाल और चावल परोसा जा रहा है। यहाँ तक कि 30 खिलाड़ियों के लिए मात्र एक शौचालय की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है और कई शौचालयों पर उन्हें गंदा होने से रोकने के लिए ताले जड़ दिए गए।

कई खिलाड़ियों को सीएम कप का उद्घाटन होने तक भी खेल संबंधी पोशाक उपलब्ध नहीं करायी गयी। कुछ खिलाड़ियों ने बताया कि उन्हें भोजन बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा है और वे भोजन के लिए आस-पास के क्षेत्रों में भटक रहे हैं। कुछ खिलाड़ी अपने पैसों के बलबूते पर भोजन का प्रबंध करते नजर आए हैं। खिलाड़ियों ने आवास सुविधा को लेकर भी कड़ी नाराजगी जाहिर की।

खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएँ अभी भी उपलब्ध नहीं

इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि सीएम कप के लिए सरकार की ओर से भारी भरकम 38.5 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया। मंजूर बजट को देखते हुए सुविधाएँ उस स्तर कि नजर नहीं आ रही हैं। सवाल यह उठता है कि मंजूर किया गया बजट कहाँ खर्च किया जा रहा है। जब खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं दी जा रही हैं, तब इस बजट का क्या औचित्य है।

खिलाड़ियों के अभिभावकों ने भी सुविधाओं को लेकर शिकायत की है। इन शिकायतों के संबंध में अधिकारियों से संपर्क करने पर उनका कहना है कि सब कुछ ठीकठाक चल रहा है, कहीं पर भी कोई कमी नहीं है। खेल प्राधिकरण के मुख्यालय एल.बी. स्टेडियम में ही खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाओं का यह हाल है, तब गच्ची बावली स्टेडियम में सुविधाओं का क्या हाल हो सकता है, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।

सीएम कप में भाग लेने वाले ज़िला स्तरीय खिलाड़ियों की आयु 15 से 20 वर्ष के बीच है और शुरुआती दौर में ही सुविधाओं के नाम पर उन्हें हतोत्साहित किया जाए, तो उनका भविष्य क्या हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में हतोत्साहित युवा खिलाड़ी क्या भविष्य में अपनी खेल प्रतिभा को बनाए रख सकते हैं, क्या वे ऐसे हालात में अपनी खेल प्रतिभा को निखार और उभार सकते हैं, क्या वे भविष्य में अपनी खेल प्रतिभा के बलबूते तेलंगाना का नाम रौशन कर सकते हैं, ऐसे कई सवाल उठा रहा है प्राधिकरण द्वारा आयोजित सीएम कप टूर्नामेंट। अधिकारियों के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है और वे सिर्फ ऑल ईज वेल का राग अलाप रहे हैं। (सी. सुधाकर)

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