जीव में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को जागृत करती है श्रीमद् भागवत कथा : हरिप्रियाजी
हैदराबाद, श्रीमद् भागवत व्यक्ति का घमंड नष्ट करके भक्ति, ज्ञान, वैराग्य व त्याग की भावना जागृत करती है। उक्त उद्गार सिद्दिअंबर बाजार स्थित बाहेती भवन में राजस्थानी जागृति समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस कथा की महत्ता बताते हुए कथा वाचक बाल विदुषी हरिप्रिया वैष्णवीजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा वह है, जो हमारी सभी बाधा, व्यथा को दूर करती है। संसार बदलता रहता है। संसार सुखालय नहीं दुखालय है।
यहाँ जो भी पाया है, हमें दुःख ही मिलता है, लेकिन संसार में सभी सुखों का कारण और जीवन में आनंद प्रदान करने वाली भगवान की कथा है। जब भी कथा में आएँ, तो द्वेष रहित होकर आएँ। जीवन में जो भी गलत हुआ है, उसे बाहर त्याग दें और ध्यान से कथा सुनें। किसी भी पुराण को शुरू करने से पहले उसका माहात्म्य सुना जाए, क्योंकि संसार में किसी से भी संबंध जोड़ना होता है, तो पहले उसके बारे में जानना जरूरी है।
जब तक सामने वाले व्यक्ति के बारे में अच्छे से नहीं जानेंगे, तब तक उसके साथ नाता नहीं जुड़ेगा। बांके बिहारी से संबंध जोड़ना है, तो सबसे पहले उनकी महिमा सुनो। जो व्यक्ति श्रीमद् भागवत कथा ध्यान से सुनता है, उसके अंदर यदि लक्ष्मी यानी धन वैभव का घमंड होगा, तो कथा सुन लेने से सारा घमंड चकनाचूर हो जाता है। लक्ष्मी ठाकुरजी के चरणों में रहती हैं। जो व्यक्ति लक्ष्मी के पीछे भागेगा, उसे भगवान नहीं मिलेंगे, लेकिन जो व्यक्ति भगवान विष्णु के पीछे जाएगा, उसकी ओर स्वयं लक्ष्मी बिन बुलाए आ जाती हैं।
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प्रभु से नाता जोड़ने के लिए स्वरूप जानना जरूरी
हरिप्रियाजी ने कहा कि भगवान सद् चित आनंद प्रदान करने वाले हें। व्यक्ति को यदि भगवान के साथ नाता जोड़ना है, तो पहले उनके स्वरूप को जानना होगा। महर्षि वेदव्यासजी ने भगवान का स्वरूप सत्य चैतन्य और आनंद बताया है। ठाकुर सत घन, चित घन, आनंद घन है। प्रभु सभी प्रकार से परिपूर्ण हैं।
कथा से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए कथा स्थल पर संपन्न हुई। अवसर पर कथा के मुख्य यजमान अग्रवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष अंजनी कुमार अग्रवाल, कथा के दैनिक यजमान अग्रवाल समाज के निवर्तमान अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, उद्योगपति वेणुगोपाल तोतला, कृष्ण कुमार सौंथलिया, बृजगोपाल असावा, हीरालाल सोमाणी चिनूर, समाजसेवी कमलकिशोर कांकाणी, जया रमेश जागीरदार, अशोक हीरावत, सहयोगी अग्रवाल समाज के अध्यक्ष अनिरुद्ध गुप्ता, ओमप्रकाश अग्रवाल, रामकुमार गोयल, बैजनाथ सिग्नोड़िया, जमनालाल मनोहरलाल कांकाणी, बद्रीविशाल बंसल, मधुसूदन सौंथलिया, मुकेश कुमार लोया, इन्द्रकरण सौंथलिया, दिनेश मानसिंह, महेन्द्र विजयवर्गीय, रूपेश सोनी, भगवान पंसारी, नारायणलाल बाहेती, कैलाशचंद मणियार, सुरेश कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्ष प्रेमचंद मुणोत ने किया।
अवसर पर अशोक कुमार हीरावत, सह-मंत्री रामदेव नागला, कोषाध्यक्ष संजय राठी, सह-कोषाध्यक्ष मनीष सोमाणी, संगठन मंत्री रमेश मोदानी, प्रचार मंत्री रिद्धीश जागीरदार, सदस्य जयप्रकाश लड्डा, बालाप्रसाद मोदानी, दामोदर सोमाणी, धर्मराज ढाका, नेमीचंद झा, बालाप्रसाद लड्डा, कमल भट्टड़, बद्रीविशाल तोष्णीवाल, प्रेम परवाल, गोविन्दराव बिरादर, महेश उपाध्याय, हेमलता शर्मा, लीला बजाज, आशा देवी सोमाणी, शोभा डागा, अल्का सांखला, शकुंतला नावंदर सहित अन्य ने सहयोग दिया। कथा के पश्चात सभी के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई। अतिथियों का स्वागत समिति के अध्यक्ष श्रीनिवास सोमाणी सहित अन्यों ने किया।
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