आईलापुर तांडा विध्वंस पर यथास्थिति बरकरार
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने शनिवार को हैद्रा से सवाल किया कि वह छुट्टियों के दौरान अवैध ढाँचों को क्यों गिरा रहा है। अदालत ने पूछा कि छुट्टियों के दौरान विध्वंस करने की इतनी जल्दी क्यों है। बिना नोटिस दिए कार्रवाई कैसे की जा सकती है। अदालत ने बुल्डोजर मामले में हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए गए स्पष्टीकरण पर ध्यान न देने की भी आलोचना की।
अवैध ढाँचे ढहाए जाने के दौरान संबंधित नियमों का पालन करने के लिए बार-बार अनुरोध करने पर भी हैद्रा के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है। इस व्यवहार पर अदालत ने तीव्र असंतोष जताया। अदालत ने आईलापुर तांडा में चल रहे विध्वंस पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए अंतरिम आदेश जारी किए। आईलापुर तांडा के गज्जा रंगाराव और 12 अन्य लोगों ने शनिवार को तड़के हैद्रा द्वारा किए जा रहे विध्वंस को रोकने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
बिना सुनवाई गरीबों पर कार्रवाई, रात में पहुंचा बुलडोजर
इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस बी. विजय सेन रेड्डी के आवास पर सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामावरपु चंद्रशेखर रेड्डी ने दलील देते हुए कहा कि तांडा के सर्वे नं. 119 में लगभग तीन हजार लोग रहते हैं और इन सभी ने 100 गज के भीतर घर बनाकर रखे हैं, जिससे उनकी गरीबी स्पष्ट होती है।
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ये निरक्षर और अकुशल मजदूर है, जो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। उन्होंने अपने पूर्वजों से विरासत में मिली जमीन पर घर बनाए हैं। वे इन घरों के लिए बिजली और पेयजलापूर्ति का टैक्स भी भरते हैं। बिना किसी सूचना या नोटिस के शनिवार के तड़के 2 बजे हैद्रा से 3 हजार से अधिक लोग जिनमें डीआरएफ कर्मी भी शामिल थे, हथियारों, बुल्डोजर, जेसीबी और अन्य मशीनों के साथ पहुँचे और तोड़-फोड़ की कार्रवाई की। हैद्रा ने मजदूरों को अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना ही जबरन घर खाली करवाने की कोशिश की।
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