सुधाकंवरजी ने किया आनंदऋषिजी म.सा. का गुणगान

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हैदराबाद, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमणोपासक संघ, रामकोट के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन सभा में राष्ट्रसंत आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. के 125वें जन्मोत्सव पर साध्वी सुधाकंवरजी म.सा. ने कहा कि महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव चिंचोड़ी नगर में आचार्यश्री का जन्म हुआ। आचार्यश्री ने संपूर्ण भारत भर के संतों को एक छत्र के नीचे लाकर श्रमण संघ का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन शुद्ध आनंद जीने का प्रतीक था। उनके स्मृति मात्र से आनंद की अनुभूति होती है।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, म.सा. ने कहा कि 80 वर्ष की उम्र में आचार्यश्री को पारसी सीखने की इच्छा हुई। इस कारण एक मौलवी पढ़ाने आए, तो आचार्य होकर भी पाटे से उतरकर नीचे बैठे और कहा कि गुरु का स्थान उच्च रहता है और शिष्य को नीचे बैठना चाहिए। कृतज्ञता, विनम्रता, निस्वार्थता और सरलता आपके जीवन का अभिन्न अंग था। मानवता का कल्याण उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था। आपने 13 वर्ष की अल्प आयु में आचार्य रत्नऋषिजी म.सा. के पास संयम ग्रहण किया। बाल संस्कार, आडंबर उन्मूलन, संगठन, व्यसन मुक्ति और धर्म जागरण आपका पंच सूत्री विशेष कार्यक्रम रहा। विजयप्रभाजी म.सा. ने आनंदऋषिजी म.सा. के बचपन से निर्वाण तक का पूर्ण विवेचन किया।

सुयशाजी म.सा. ने कहा कि पूरे विश्व में दो चीजें ऐसी हैं, जो सिर्फ भारत में ही नजर आती है- साधू और संत व संस्कृति। साधु-साध्वियों के आध्यात्म क्षेत्र के प्रचार-प्रसार से ही अपना धर्म और संस्कृति टीकी हुई है। जन्मदिन तो सामान्य व्यक्ति का मनाते हैं, मगर जन्म जयंती महापुरुषों की मनायी जाती है। एक संत का जन्म होता है, तो हर क्षेत्र में खुशी का वातावरण तैयार होता है। हर महापुरुष में सरलता, वात्सल्य और विनय गुण विद्यमान होता है।

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जन्म महोत्सव में धर्म साधना और उपवासों का आयोजन

संसार की जीवन यात्रा में या क्रिकेट के खेल में सफलता के लिए आवश्यक है ट्रेनिंग (प्रशिक्षण), टेकनीक अर्थात तकनीकी निपुणता, टाइमिंग अर्थात समय का चयन और टेंपरामेंट अर्थात जज्बा आवश्यक है। म.सा. ने कहा कि जीवन में हर परिस्थिति में ढलने की सहन शक्ति आवश्यक है। आपका पुण्य बल कितना भी प्रबल हो, पुरुषार्थ के बीना सफलता नहीं मिलेगी। विज्ञप्ति में बताया गया कि राजस्थान के भीलवाड़ा से प्रदीप बाफना परिवार म.सा. के दर्शन-वंदन के लिए उपस्थित हुआ।

धर्म सभा का संचालन करते हुए संघ के अध्यक्ष किशोर कुमार मुथा ने बताया कि आनंदऋषिजी म.सा के तीन दिवसीय जन्म महोत्सव का तीसरा दिन गुणानुवाद सभा और सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया। आगामी 1 से 3 अगस्त तक को सुधाकंवरजी म.सा. का जन्म महोत्सव मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत 1 अगस्त को एकासन दिवस, 2 अगस्त को सामायिक दिवस और 3 अगस्त को भक्तामर स्तोत्र की विशेष साधना होगी।

महामंत्री राजेश सुराणा ने बताया कि आज महामंत्र नवकार जाप का लाभ शकुंतला रमेश बरमेचा ने लिया। आयंबिल का लाभ तेजकंवर कोठारी ने लिया। तेले की कड़ी में समता सिंघी ने आज 3 उपवास के और प्रीति लासोड ने 1 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। आज की प्रभावना का लाभ संघ के कार्याध्यक्ष धनराज गडवाणी ने लिया। संघ के मंत्री जितेंद्र भंडारी ने धन्यवाद प्रेषित किया।

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