34 Hyderabad
साँसाँ(1) आरइ-जारइ तो, ज़िदगी तो नइँ होती।अँख्याँ(2) मूचको बैटगै तो, बंदगी(3) तो नइँ होती।। करम कैसे कररै तुम, इस्का बी(4)…