तेलंगाना उच्च न्यायालय : सिंगरेणी श्रमिकों के लिए राहत
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सिंगरेणी श्रमिकों के संबंध में विकलांगता निर्धारण में चिकित्सा बोर्ड के दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई। अदालत ने इस तथ्य पर आपत्ति जताई है कि लगभग 121 लोगों को एक समान रूप से सामान्य विकलांगता से ग्रसित घोषित कर दिया गया था।
न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि बोर्ड ने यांत्रिक रूप से विकलांगता का निर्धारण किया है। श्रमिकों के अनुरोध को अस्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर कर अपने परिवार के सदस्यों को रोजगार दिलाने की माँग की, क्योंकि वे बीमारी और दुर्घटनाओं के कारण विकलांग हो गए थे।
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इस मामले की सुनवाई करने वाले एकल न्यायाधीश ने चिकित्सा बोर्ड को पुन जाँच करने का आदेश दिया। इन आदेशों को चुनौती देते हुए सिंगरेणी कॉलरीस द्वारा दायर अपीलों की सुनवाई हाल ही में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने की। फैसले में कहा गया कि पैरों में विच्छेदन, हृदयगति रुकने से पक्षाघात, दृष्टि हीनता, मस्तिष्क और तंत्रिका रोग सामान्य विकलांगता नहीं है। अदालत ने आदेश दिया कि इस श्रेणी में आने वाले 5 लोगों को स्थाई विकलांगता से ग्रसित माना जाए और उन्हें लाभ प्रदान किया जाए।
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