घंटी भक्त और भगवान के बीच बनाती है संपर्क

मंदिर की घंटियां तांबा, जस्ता, निकल और क्रोमियम जैसी धातुओं के खास मिश्रण से बनाई जाती हैं। जब इन्हें बजाया जाता है, तो इनसे निकलने वाली गूंज कम से कम 7 सेकंड तक बनी रहती है। यह गूंज हमारे दिमाग के दायें और बायें हिस्सों को एक साथ जोड़ देती है, जिससे मन तुरंत शांत हो जाता है।

सनातन धर्म में मंदिरों में की जाने वाली पूजा का विशेष महत्व है। वास्तव में मंदिर में भक्त अपनी एकाग्रता शक्ति का विस्तार कर सकते हैं। हर मंदिर के अपने नियम भी होते हैं, किंतु सभी मंदिरों में प्रवेश करते ही सबसे पहला काम घंटी बजाने का होता है। इसके साथ गहरी और पुरानी मान्यता जुड़ी है। शास्त्रों और पुराणों में घंटी बजाने के महत्व को विस्तार से बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, घंटी की आवाज से निकलने वाला नाद ॐ की गूंज के समान होता है।

माना जाता है कि घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाओं में चेतना जागृत होती है और हमारी प्रार्थना सीधे उन तक पहुंचती है। धार्मिक दृष्टिकोण से घंटी बजाना केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने का एक पवित्र माध्यम है। शास्त्रों में घंटी की ध्वनि को आह्वान कहा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि हम ईश्वर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उनसे अपनी प्रार्थना सुनने का विनम्र अनुरोध करते हैं।

घंटी की गूंज: भक्ति का संदेश और मन की शांति

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घंटी बजाकर हम मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं की प्रतिमाओं में चेतना जागृत करते हैं। यह एक तरह का संकेत है- हे ईश्वर, मैं आपके द्वार पर हाजिर हूँ, मेरी प्रार्थना सुनें। स्कंद पुराण में घंटी की ध्वनि को ॐ की गूंज के समान बताया गया है। माना जाता है कि घंटी से निकलने वाला स्वर बुरी शक्तियों को दूर भगाता है और सकारात्मकता का संचार करता है।

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घर के मंदिर में अक्सर गरुड़ घंटी का उपयोग होता है, जिसके ऊपरी हिस्से पर भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ देव बने होते हैं। गरुड़ को देवताओं का संदेशवाहक माना जाता है, इसलिए इसे बजाना हमारी भक्ति का संदेश सीधे प्रभु तक पहुंचाने का माध्यम है। मंदिर की घंटियां तांबा, जस्ता, निकल और क्रोमियम जैसी धातुओं के खास मिश्रण से बनाई जाती हैं। जब इन्हें बजाया जाता है, तो इनसे निकलने वाली गूंज कम से कम 7 सेकंड तक बनी रहती है। यह गूंज हमारे दिमाग के दायें और बायें हिस्सों को एक साथ जोड़ देती है, जिससे मन तुरंत शांत हो जाता है।

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