रोटी की जात

कौन जात हो भाई? मजदूर जात है साहब। वैसे, मजदूर की भी कोई जात होती है क्या? जात तो सबकी होती है। हम तो मजदूर जात हैं। सच में तुम्हारी कोई जात नहीं? है साहब, गरीब जात। यह तो कोई जात नहीं होती। होती है साहब, सिर्फ दो जात होती हैं-एक अमीर जात और दूसरी गरीब। सुना है कोई देशभर में जात की गिनती कराने की लड़ाई लड़ रहा है, कह रहा है कि हर जात की गिनती कराऊंगा। कौन जात का है?
सुना है, उसकी भी अपनी कोई जात नहीं है। जरूर कोई भरे पेट वाला अमीर जात का होगा। तुम्हें कैसे पता कि अमीर जात का होगा? साहब, जिसका पेट भरा हो, जो खाली दिमाग हो, उसे ही शैतानी सूझती है। शायद तुम ठीक कहते हो। शायद नहीं, पूरी तरह ठीक—जिसमें आदमियत नहीं होती, वही आदमी में जात-पात ढूंढता है। आम आदमी को रोजी-रोटी कमाने से फुर्सत ही कहाँ है, जो जात-जात खेले? तू तो बड़ा समझदार निकला रे! साहब, न रोटी की कोई जात होती है और न गरीब की।
सुधाकर आशावादी
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