केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2026 विवादों के बीच पारित हुआ।

नई दिल्ली, राज्यसभा ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक, 2026 पारित कर दिया है, जिसका उद्देश्य सभी सीएपीएफ (संस्थागत सशस्त्र पुलिस बल) के लिए सेवा नियमों को एकीकृत करना और उनकी कार्यकुशलता और मनोबल को बढ़ाना है। विपक्ष के वॉकआउट के बावजूद, इस विधेयक में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं, जिनमें सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद विशिष्ट आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति भी शामिल है। संघीय ढांचे के प्रभावों और विधायी प्रक्रिया को लेकर बहस छिड़ी।
राज्यसभा ने बुधवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी, जिससे विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के लिए एक एकीकृत कानूनी ढांचा लागू हो गया। ध्वनि मत से पारित इस विधेयक का उद्देश्य मौजूदा असमान सेवा नियमों को प्रतिस्थापित करना है, हालांकि विपक्ष ने विरोध में सदन से वॉकआउट किया।
विपक्ष ने उठाए कई सवाल और जताया विरोध
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बहस को संबोधित करते हुए सीएपीएफ की कार्यकुशलता और मनोबल बढ़ाने के विधेयक के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के दावों के विपरीत, यह विधेयक देश की संघीय संरचना को सुदृढ़ करता है और भर्ती एवं सेवा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करता है।
इस विधेयक के तहत सीएपीएफ में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 50% पदों को महानिरीक्षक रैंक पर प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरा जा सकेगा। यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद लाया गया है जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड तक आईपीएस की प्रतिनियुक्तियों में चरणबद्ध कमी करने की बात कही गई थी। प्रक्रियात्मक प्रतिक्रियाओं से असंतुष्ट विपक्ष ने विधेयक की समीक्षा के लिए एक चुनिंदा संसदीय समिति की मांग की, जिसके परिणामस्वरूप नाटकीय रूप से सदन से बाहर चले गए। (भाषा)
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