उप-महापौर चाहती हैं ओयू परिसर की नौ झुग्गी बस्तियों का समाधान

हैदराबाद, उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर के भीतर स्थित नौ झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के लेकर जीएचएमसी की उप-महापौर मोते श्रीलता शोभन रेड्डी ओयू के कुलपति से मिलकर विस्तार से चर्चा की साथ ही माँग की कि बस्तियों में जन सामान्य को सुविधाओं की गंभीर समस्या है।

मोते श्रीलता ने शोभन रेड्डी के साथ उस्मानिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुमार मोलुगरम से भेंट कर झुग्गी बस्तियों के निवासियों से जुड़ी समस्याओं के विषय में बताया कि इन्हें पीने के पानी की अनियमित आपूर्ति, खराब सड़कें, लगातार बिजली में कटौती, स्थायी आवास की कमी जैसी गंभीर समस्याएँ हैं। कई वर्षों से अनेक सरकारों के बदलने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान लागू नहीं हो पाया है।

ओयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में दशकों पुरानी समस्या दुर्भाग्यपूर्ण

उप-महापौर ने उस्मानिया विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास और राष्ट्रीय महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के परिसर में इस तरह की समस्याओं का दशकों तक बने रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मुद्दे का स्थायी व व्यावहारिक समाधान आवश्यक है। उन्होंने बताया कि लगभग 72 से 80 एकड़ भूमि में फैली हुई नौ झुग्गी बस्तियों में असुविधाओं से न केवल वहाँ रहने वालों के जीवन स्तर पर असर पड़ रहा है, बल्कि विश्वविद्यालय के नियोजित विकास, विस्तार व सुरक्षा में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि स्थायी समाधान के रूप में झुग्गी बस्तियों के निवासियों को पास की लगभग 10 एकड़ भूमि में पुनर्वासित कर उनके लिए डबल बेडरूम वाले पक्के मकान बनाए जा सकते हैं।

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इससे दशकों से वहाँ रह रहे परिवारों को न्याय मिलेगा और शेष 70 एकड़ मूल्यवान भूमि को पूरी तरह उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में शामिल किया जा सकेगा। यह समाधान गैर-राजनीतिक व मानवीय दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। संतुलित निर्णय से झुग्गी बस्ती के निवासियों को न्याय मिलेगा तथा विश्वविद्यालय की गरिमा व भविष्य की आवश्यकताओं की भी रक्षा हो पाएगी। कुलपति ने प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित सरकारी विभागों से परामर्श व विषय की जाँच कर सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

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