न्यायिक ढाँचा हो मजबूत : सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत

हैदराबाद, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जब न्यायपालिका और कार्यपालिका एक ही उद्देश्य के साथ काम करते हैं, तो संविधान सही मायने में जीवंत हो उठता है। न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए मजबूत न्यायिक अवसंरचना काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए देश की सभी सरकारें अब यह मानती हैं कि न्यायिक ढांचे को मजबूत करना कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य तत्व है।

सीजेआई ने रविवार को राजेंदरनगर में तेलंगाना हाईकोर्ट के जोन-2 की आधारशिला रखी। उन्होंने विकास कार्यों पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम और अब तेलंगाना में अदालती परिसरों की नींव रखी है। इससे पता चलता है कि हर विचारधारा की सरकारें अदालतों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के महत्व को समझ रही हैं।

सभा को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि हर बड़ा कार्य तीन चरणों में विकसित होता है- आरंभ, प्रगति और पूर्णता। हाईकोर्ट परिसर वर्तमान में विस्तार के एक महत्वपूर्ण चरण में है, जहाँ अदालत कक्ष न्यायपालिका का दिखाई देने वाला चेहरा है। वहीं उनके पीछे एक व्यापक सहयोगी तंत्र न्याय वितरण को बनाए रखता है। नया परिसर संस्थागत दक्षता और स्वतंत्रता को बढ़ाएगा। इसमें अदालत कक्ष, प्रशासनिक कार्यालय, आवासीय परिसर, प्रशिक्षण केंद्र और वकीलों के लिए विशेष स्थान जैसी समेकित सुविधाएँ होंगी।

स्व-सम्पूर्ण परिसर से न्यायिक कार्य प्रणाली होगी मजबूत

इस प्रकार का स्व-सम्पूर्ण परिसर न्यायपालिका के दैनिक कार्य को मजबूत करेगा और अलग-अलग स्थानों पर निर्भरता को कम करेगा। यह पूरा परिसर रूट सिस्टम की तरह कार्य करेगा, जो दीर्घकालिक संस्थागत विकास को समर्थन देगा। उन्होंने न्यायिक अभिलेखों को संरक्षित रखने के लिए केंद्रीय रिकॉर्ड रूम तथा प्रशिक्षण और विधिक जागरूकता कार्यक्रमों के लिए ऑडिटोरियम जैसी सुविधाओं के महत्व पर भी जोर दिया।

हैदराबाद में हाईकोर्ट परिसर के प्रस्तावित मॉडल और नक्शों को देखने के बाद सीजेआई ने भवन निर्माण के प्रस्ताव की सराहना की। उन्होंने कहा कि 100 एकड़ में फैला यह नया परिसर देश के सबसे बेहतरीन कोर्ट परिसरों में से एक होगा।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि भारत में कोई मंदिर, मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा बनाना एक दुर्लभ अवसर होता है, लेकिन एक कोर्ट परिसर अर्थात न्याय का मंदिर सभी धर्मों के लोगों के लिए समान महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में तीनों अंग विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका स्वायत्तता, परस्पर निर्भरता और आपसी सम्मान के साथ कार्य करते हैं।

एक आम नागरिक के लिए न्यायालय अंतिम दरवाज़ा और सहारा होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट का शिलान्यास उनके जीवन का बड़ा अवसर है। अतीत में कई सरकारें और मुख्यमंत्री इस परियोजना को शुरू कर सकते थे, लेकिन किसी कारणवश यह कार्य उनकी सरकार के हिस्से में आया है। नया हाईकोर्ट न्याय की आस में आने वाले गरीब, वंचित, पीड़ित और कमज़ोरों के लिए मंच होगा।

नया हाईकोर्ट समाज और लोकतंत्र का प्रतीक बनेगा

यह समाज और लोकतंत्र का प्रतीक तथा एक कार्यात्मक जीवनरेखा बनेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान हाईकोर्ट ऐतिहासिक महत्व का भवन है, लेकिन अब सभी हितधारकों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं है। इसी कारण सरकार ने नया हाईकोर्ट बनाने का निर्णय लिया। यह भवन केवल विरासत नहीं, बल्कि सरकार के लोकतांत्रिक दृष्टिकोण और मूल्यों को भी दर्शाता है।

रेवंत रेड्डी ने कहा कि सरकार न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देती है। सभी स्तंभ आपसी सम्मान के साथ मिलकर कार्य करें और टकराव से बचें। कार्यपालिका का कर्तव्य है कि वह न्यायपालिका को सर्वोत्तम आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करे, ताकि वह अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर सके। न्यायपालिका को बेहतर और त्वरित न्याय देने के लिए आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध कराना कार्यपालिका की जिम्मेदारी है।

इसलिए हैदराबाद में नये हाईकोर्ट का निर्माण न केवल भारत के सबसे बड़े हाईकोर्ट भवनों में से एक होगा, बल्कि आधुनिकता और उत्कृष्ट सार्वजनिक अवसंरचना का मानक भी बनेगा। इसके लिए 100 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गयी है। ज़ोन-1 में संस्थागत भवनों का कार्य प्रगति पर है। जोन-2 में आवासीय भवन शामिल हैं। इसे अगले वर्ष दिसंबर तक रिकॉर्ड समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार पूरे राज्य में 49 न्यायालयों और विभिन्न शहरों व जिलों में कई आवासीय परिसरों के निर्माण पर कार्य कर रहे हैं।

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सरकार ने अदालत के फैसलों और सुझावों का सम्मान दोहराया

सीएम ने कहा कि सरकार अदालत के न केवल सभी निर्णयों और फैसलों का सम्मान करती है, बल्कि विभिन्न टिप्पणियों और सुझावों का भी सम्मान करते हैं। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को भरोसा दिलाया कि जजों के आवास और अन्य सुविधाओं सहित पूरा हाईकोर्ट परिसर दो साल के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि नये हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए 2,583 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है।

यह पूरा प्रॉजेक्ट दो चरणों में पूरा होगा। जोन-1 की नींव 27 मार्च 2024 को रखी गई थी और वहाँ निर्माण कार्य पहले से ही चल रहा है। जोन-1 में मुख्य कोर्ट परिसर और कार्यालय की इमारतें होंगी। वहीं, जोन-2 लगभग 60 एकड़ में फैला है, जिसमें जजों के लिए आवास और एक सेंट्रल रिकॉर्ड रूम बनाया जाएगा।

इससे पहले स्वागत भाषण में तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने कहा कि ज़ोन-2 का विकास इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसे न्यायपालिका की बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ज़ोन-2 में आवासीय सुविधाएँ, केंद्रीय रिकॉर्ड रूम और अन्य आवश्यक अवसंरचना शामिल होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि नए परिसर को पहुँच, दक्षता और स्थिरता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है, ताकि यह भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके। अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी और विधि क्षेत्र के सदस्य उपस्थित थे।  

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