`निर्वस्त्र’ राजनीति का नया एआई वर्जन!
दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, जहाँ दुनिया भर के तकनीकी दिग्गज इकट्ठा होकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर मंथन कर रहे थे, वहाँ अचानक एक अर्धनग्न तमाशा हो गया। सबसे बूढ़ी पार्टी के युवा कार्यकर्ता शायद एआई को असली इंसानियत सिखाने के लिए शर्ट उतारकर नारे लगाते घुस आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत-अमेरिका व्यापार सौदे के खिलाफ। यह दृश्य इतना इम्पैक्टफुल था कि प्रधानमंत्री को कहना पड़ा कि बूढ़ी पार्टी तो पहले से नंगी है, कपड़े उतारने की क्या जरूरत! हो सकता है यह सच हो; फिर भी यह सवाल तो उठता ही है कि, यह प्रदर्शन एआई की तरह स्मार्ट था, या सिर्फ एक पुराने राजनैतिक बग का अपडेट वर्जन?
यों तो राजनीति के लिए नंगई कोई नई और विचित्र रणनीति नहीं। दुनिया भर में नग्न या अर्धनग्न प्रदर्शनों का चलन है। पोन का महिला संगठन फेमेन तो स्त्रा अधिकारों के लिए महिलाओं के टॉपलेस प्रदर्शन के लिए विश्वप्रसिद्ध है। यहाँ तो बस कुछ मर्द ही आए थे – मर्दानगी दिखाने। और बेचारे धरे गए। पता नहीं, पुलिस कस्टडी में किस कष्ट में होंगे। पुलिस को इस तर्क से क्या कि नग्नता समाज की दोगली नैतिकता को नंगा करती है। वरना पेटा कार्यकर्ता भी तो पशु अधिकारों के लिए नंगे होकर सड़कों पर उतरते हैं – फर पहनने से बेहतर है कि दिगंबर रहें!
बेशक, जब शब्द असफल हो जाते हैं, तब नग्नता ध्यान खींचती है। देखिए न, हजारों लोग वर्ल्ड नेकेड बाइक राइड पर निकलते हैं। नंगे सवार होकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। यूरोप-अमेरिका में यह फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का हिस्सा है। वहाँ कानून भी ऐसे प्रदर्शनों को सहन करता है, बशर्ते कोई यौन उत्पीड़न न हो। पर भारत में? कुछ युवकों ने कमीज क्या उतारी, हंगामा हो गया। देश भर में उनके खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। शर्टलेस प्रदर्शन को राष्ट्रीय शर्म का विषय और रिपब्लिक की छवि के लिए खतरा ही नहीं, राष्ट्रदोह तक बताया जा रहा है!
वैसे हंगामे की बड़ी वजह है, शर्त उतारकर टी-शर्ट लहराने के लिए चुना गया स्थान और समय। भारत मंडपम में, जहाँ एआई के भविष्य पर चर्चा हो रही थी, वहाँ इन होनहार नौनिहालों ने शर्टलेस मोड में एंट्री मारी। उन्हें लगा होगा कि कथित तौर पर किसानों को नुकसान पहुँचाने वाले व्यापार सौदे के खिलाफ तो कुछ हो या न हो, रातोंरात उनकी पार्टी ग्लोबल मीडिया में छा जाएगी। बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा?
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पहचान का संकट झेल रही पार्टी को अंदाज़ न था कि यह पैंतरा आत्मघाती भी हो सकता है। पर, खुद डूबने वाले कब सनम को डुबोने से बाज़ आते हैं? हो सकता है, वे एआई से कहना चाहते हों- देखो, हम इंसान कितने रियल हैं! या शायद यह एक डीपफेक प्रोटेस्ट था, जो असली लगे लेकिन फेक हो! कुछ भी हो पर इसमें शक नहीं कि वे एक वैश्विक मंच को ओछी और निर्वसन राजनीति का अखाड़ा बना गए! इतनी ओछी और निर्वसन कि उनके अपने सहयोगी भी शर्मा रहे हैं!
इस बहाने सयानों को नग्न प्रदर्शन की परंपरा पर शोध करने का अच्छा मौका मिला। वे बता रहे हैं कि स्पेन में नग्नता दिवस मनाया जाता है। लोग समुद्र तट पर नंगे घूमते हैं। इससे शरीर की सकारात्मक छवि बनती है। ऑस्ट्रेलिया में न्यूड बीच कानूनी हैं। वहाँ नग्नता स्वतंत्रता का प्रतीक है। लेकिन एशिया में, खासकर भारत जैसे देशों में, यह अश्लीलता का पर्याय है। सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य दंडनीय है। फिर भी कभी कभार राजनैतिक कार्यकर्ताओं – महिलाओं तक – ने नग्नता का सहारा लिया है, जिसे सराहा नहीं गया। फिल्म उद्योग की बात अलग है।
वहाँ तो कैबरे से लेकर आइटम सॉन्ग तक में नग्नता बिकती है। लेकिन राजनीति केवल हमाम में ही इसकी अनुमति देती है। शायद यही वजह है कि यह प्रदर्शन वांछित इम्पैक्ट पैदा करने के बजाय मीम और गेम तक सिमटकर रह गया! बाकी बातें इन्वेस्टीगेशन और इंटेरोगेशन के बाद!
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