साक्षरता बढ़ाना हो नई नीति का लक्ष्य : रामचंदर राव

हैदराबाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि राज्य की नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य साक्षरता बढ़ाना और छात्रों को उच्च शिक्षा की ओर मार्गदर्शन करना होना चाहिए। उस्मानिया विश्वविद्यालय के पीजीआरआरसीडीई मिनी कॉन्फ्रेंस हॉल में फोरम फॉर नेशनलिस्ट थिंकर्स के तत्वावधान में तेलंगाना शिक्षा नीति-2026 विषय पर आयोजित गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार द्वारा गठित राज्य शिक्षा आयोग में अर्बन नक्सल और माओवादी विचारधारा से प्रभावित लोगों का प्रभाव अधिक है।

ऐसे लोगों से तेलंगाना शिक्षा नीति-2026 पर रिपोर्ट तैयार कराना चिंताजनक है। इससे छात्रों पर वामपंथी विचारधारा थोपने का प्रयास हो सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में योग्य बीएड शिक्षकों के बावजूद उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। शिक्षकों के वेतन भुगतान और पदोन्नति में देरी भी गंभीर समस्या है। रामचंदर राव ने आगे कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई सरकारी स्कूल बंद होने की स्थिति में हैं।

अनेक स्कूलों में शौचालय, मिड-डे मील और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने दावा किया कि 2024-25 में राज्य में 5,021 सरकारी स्कूल थे, जो अब घटकर 2,023 रह गए हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा, भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा को महत्व देने की माँग करते हुए कहा कि गुरुकुल विद्यालयों को समाप्त करने का प्रस्ताव भी उचित नहीं है।

व्यवस्था में भ्रम पैदा कर रही हैं शिक्षा आयोग की सिफारिशें : प्रो. तिरुपति राव

उस्मानिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. टी. तिरुपति राव ने कहा कि तेलंगाना शिक्षा आयोग की सिफारिशें शिक्षा विकास में मदद करने के बजाय सरकारी शिक्षा व्यवस्था में भ्रम पैदा कर रही हैं। उन्होंने राउंड टेबल बैठक में संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों में करीब 80 प्रतिशत तक शिक्षकों के पद खाली हैं और इन्हें तुरंत भरना चाहिए। एक ओर विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की भर्ती की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूल शिक्षकों का वेतन अधिक होने की बात कही जा रही है, जो उचित नहीं है।

प्रो. तिरुपति राव ने कहा कि नए स्कूल खोलने के साथ-साथ कमजोर वर्गों के क्षेत्रों में अध्ययन केंद्र स्थापित करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 व्यापक शोध और विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है और इसमें क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने राज्य सरकार से सरकारी स्कूलों को मजबूत करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने का आग्रह किया।

यह भी पढ़ें… वेलुगुमट्ला पीड़ितों को नए आवासदे सरकार : के. कविता

रिपोर्ट से शिक्षा प्रणाली को नुकसान : शिक्षक संघ

तेलंगाना क्षेत्र शिक्षक संघ ने राज्य शिक्षा आयोग की रिपोर्ट से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय कमजोर होने का आशंका जतायी। संघ के नेताओं ने कहा कि छात्रों को 45 अंक प्राप्त करने पर पास करने का प्रस्ताव शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के फैसलों से विशेष रूप से कमजोर वर्गों के छात्र पढ़ाई में रुचि खो सकते हैं और स्कूल छोड़ने की घटनाएँ बढ़ सकती हैं।

संघ ने सरकार से शिक्षा आयोग की सिफारिशों पर पुनर्विचार करने की मांग की। अवसर पर विधान परिषद सदस्य मल्का कोमुरय्या, पूर्व उच्च शिक्षा परिषद अध्यक्ष प्रो. टी. पापी रेड्डी, तेलंगाना उच्च शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आर. लिंबाद्री, एनसीईआरटी के पूर्व सदस्य सचिव प्रो. पी. मुरली मनोहर सहित शिक्षाविद्, शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि और छात्र संघों के नेता उपस्थित थे।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button