ऑफिस में बुरी ख़बर सुनाने का भी एक तरीका होता है

यदि आप ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में हैं कि आपको किसी के बारे में, किसी को बुरी ख़बर देनी है तो आप काफी कशमकश में आ जाते हैं कि आप इस ख़बर को कैसे सुनाएंगे? बुरी ख़बर सुनने के बाद सुनने वाले की क्या प्रतिक्रिया या होगी, उस समय आपका खुद का रिएक्शन कैसा होगा, यह सचमुच बेहद कठिन स्थिति होती है।
इसके लिए डब्ल्यू तकनीक का सहारा लें। कंपनी द्वारा पॉलिसी में किया गया कोई ऐसा बदलाव जिससे कंपनी के या विभाग से संबंधित कर्मचारियों पर इसका बुरा प्रभाव होता है, इसके बारे में अपने विभाग से संबंधित लोगों को आप कैसे सूचित करेंगे?
क्या हुआ?
किसी को भी बुरी ख़बर सुनाने के लिए उस खबर के इर्दगिर्द शब्दों का जाल नहीं बुनना चाहिए कि क्या हुआ? इसके बारे में तुरंत सही और सटीक शब्दों में बयान करें।
ऐसा क्यों हुआ?
आप अपनी तरफ से स्थिति का जायजा लेकर उस बुरी खबर से जुड़ा विश्लेषण करें और उसकी वजह क्या रही, इसके बारे में स्पष्ट शब्दों में बताएं।
आगे क्या होगा?
आपने जिसे बुरी खबर सुनायी, अब उसे क्या करना चाहिए, इसके बारे में उससे विस्तार से बात करें या जो कुछ बिगड़ गया है, उसको कैसे सही किया जा सकता है। कहें कि चलिए इस बारे में विस्तार से बात करते हैं।
क्या हुआ था?
दरअसल उस बुरी घटना या पॉलिसी में किसी बदलाव के बारे में शब्दों का जाल बुनने की बजाय चीजों को छुपाने की बजाय, क्या हुआ था- इसके बारे में बताएं। सीधे, साफ और स्पष्ट तरीके से। हालांकि आप इसको कम शब्दों में भी बता सकते हैं।
जैसे मुझे बहुत अफसोस है, लेकिन आज आपके लिए अच्छी खबर नहीं है। इसके बाद खबर सुनाते हुए तुरंत उस जख्म पर मरहम लगाने की कोशिश करें और उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया आए तो आप कह सकते हैं कि कोई बात नहीं, जिससे उसको दिलासा मिले।
ऐसा क्यों हुआ?
ऐसा क्यों हुआ? यह सुनने वाले की भी जिज्ञासा होती है। इसमें सुनने वाले को यह जाहिर करें कि आपको वजह अच्छी तरह से समझ में आ रही है कि ऐसा क्यों हुआ। आपको छानबीन के बाद जो भी वजह समझ में आती है, आप अपनी एप्रोच और फिलहाल उस वक्त की स्थिति को बता सकते हैं।
आगे क्या होगा?
अगला कदम पर आपको दो तरह से अपनी प्रतिक्रिया देनी है। नुकसान की भरपायी के लिए तुरंत क्या किया जा सकता है। दूसरा कदम यह मुद्दा या बुरी बात दोबारा न हो, इसके लिए क्या एहतिआत बरता जा सकता है। इन तीनों में अब आगे क्या करना है, इसके लिए सबसे ज्यादा प्रयासरत रहना चाहिए।
क्या और क्यों
क्या और क्यूं के बाद वस्तुस्थिति बदल जाती है और उसके बाद आने वाली स्थिति के लिए जिसे आपने बुरी खबर दी है, उसका और उससे जुड़े दूसरे लोगों को इसके लिए अपने आपको तैयार करना पड़ता है। यह सारी बातें उस कारपोरेट जगत से जुड़ी हैं, जहां पर फाइनेंस से संबंधित चीजों में एकाएक बदलाव होता है और कंपनी या सरकारी नीतियों में अचानक बदलाव का असर आपके जॉब और कॅरियर पर पड़ता है।
तीन डब्ल्यू की तकनीक उस बुरी खबर के लिए कारगर होती है, जहां खबर का प्रभाव ज्यादा तीव्र और भयानक न हो। लेकिन अगर यह बुरी खबर आपको अकसर देनी पड़ती है, तो आपको कई सुनने वालों को भी नाराज करना पड़ता है। भले ही आप कितने ईमानदार हों और आपको समस्या की जड़ का एहसास हो, इसके बावजूद काफी हद तक इसका कसूरवार भी आपको ही माना जाता है।
वो इसलिए क्योंकि सुनने वालों को आपसे बहुत सारी आपेक्षाएं होती हैं। ऐसे में आपका इसके लिए अपने आपको मानसिक रूप से हर समय तैयार रखना होता है और अपने भीतर इतनी ऊर्जा बनाकर रखनी होती है कि आप जिन्हें वह बुरी खबर सुनाते हैं, मुश्किल के वक्त में वो आप पर विश्वास रखें।
क्या आप जानते हैं?
- बहुत सारे अच्छी खबरों के बीच में लोगों को बुरी खबर पहले सुनना अच्छा लगता है। विभिन्न सर्वेक्षण भी बताते हैं कि अगर बुरी खबर पहले सुना दी जाए तो बाद की अच्छी खबर से उन्हें काफी मानसिक बल मिलता है। बुरी खबर से वो जहां असहज होते हैं, अच्छी खबर सुनाने तक वे अपने आपको मानसिक रूप से बुरी खबर के लिए तैयार कर लेते हैं।
- विश्वास को मजबूती देने के लिए पादर्शिता बहुत कारगर साबित होती है। बिजनेस कम्यूनिकेशन रिपोर्ट में हुए हालिया अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि ईमानदार और ओपन होकर अगर बुरी खबर भी बतायी जाती है तो इससे विश्वसनीयता बढ़ती है। साफगोई से सभी खुश रहते हैं और इसकी सराहना करते हैं।
विवेक कुमार
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