सीएसआईआर-एनजीआरआई में प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ

हैदराबाद, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनजीआरआई) उप्पल में भूतापीय ऊर्जा अन्वेषण के लिए भूविज्ञान (जी2ई2) प्रशिक्षण कार्यक्रम आज से आरंभ हुआ, जो आगामी 28 फरवरी तक चलेगा। नगर के उप्पल स्थित सीएसआईआर-एनजीआरआई में निदेशक डॉ. प्रकाश कुमार ने सीएसआईआर-एकीकृत कौशल पहल के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। समारोह में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व उप महानिदेशक डॉ. पी. बी. सरोलकर, कौशल पहल कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ए.आर. बंसल, पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. लबानी रे और सह-पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. के. रामा मोहन उपस्थित थे।

अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. प्रकाश कुमार ने कहा कि भूतापीय ऊर्जा अन्वेषण पर केंद्रित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करना सीएसआईआर-एनजीआरआई के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भूतापीय ऊर्जा एक विश्वसनीय आधार-भार नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन के रूप में अपार संभावनाएं प्रदान करती है और भारत के सतत, कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऊर्जा समाधानों की ओर संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत और कौशल भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य रोजगार योग्य कौशल को बढ़ाकर वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच के अंतर को पाटना है।

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विवर्तनिक सक्रिय क्षेत्रों में भूभौतिकीय अन्वेषण की आवश्यकता बताई

अवसर पर डॉ. पी. बी. सरोलकर ने भारत की अपार भूतापीय क्षमता विशेष रूप से विवर्तनिक रूप से सक्रिय क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। उन्होंने इन संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए व्यवस्थित अन्वेषण रणनीतियों, उन्नत भूभौतिकीय इमेजिंग, जल भू रासायनिक लक्षण वर्णन और एकीकृत भूवैज्ञानिक मॉडलिंग की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. ए. आर. बंसल ने सीएसआईआर-एनजीआरआई में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया और प्रतिभागियों को उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

देशभर के कई संस्थानों के प्रतिभागियों ने भूतापीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. लबानी रे ने बताया कि जी2ई2 कार्यक्रम भूतापीय ऊर्जा अन्वेषण के लिए ऊष्मा प्रवाह अध्ययन, जल भू-रसायन विज्ञान और गुरुत्वाकर्षण, चुंबकीय, प्रतिरोधकता (ईआरटी, ईवीआरआई), चुंबक-स्तंभीय और भूकंपीय तकनीकों सहित भूभौतिकीय विधियों में अंतर विषयक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को प्रभावी भूतापीय संसाधन मूल्यांकन और अन्वेषण के लिए आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से लैस करना है।

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