ईरान युद्ध पर ट्रंप: नाटो अनुभव कभी नहीं भूलूंगा

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक सं‍धि संगठन (नाटो) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ईरान युद्ध के दौरान इस सैन्य गठबंधन और दक्षिण कोरिया, जापान व ऑस्ट्रेलिया जैसे मित्र देशों ने अमेरिका की मदद नहीं की।

व्हाइट हाउस में सोमवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने यह टिप्पणी की। उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब नाटो के महासचिव मार्क रूट जल्द ही वाशिंगटन दौरे पर आने वाले हैं। ट्रंप पहले भी नाटो को “कागजी शेर” बता चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध ने नाटो को लेकर ऐसा प्रभाव छोड़ा है, “जो मेरे दिमाग से कभी नहीं जाएगा।”

स्पष्ट किया कि नाटो के साथ मतभेद तब शुरू हुए, जब ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने के उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया। ट्रंप ने कहा, “नाटो एक कागजी शेर है, जिससे व्लादिमीर पुतिन भी नहीं डरते।” ईरान युद्ध पर ट्रंप ने कहा कि नाटो सदस्य देशों ने “जानबूझकर मदद नहीं की।” उन्होंने कहा, “देखिए, हम नाटो के पास गए। मैंने बहुत जोर नहीं दिया, बस इतना कहा- अगर आप मदद करना चाहें तो अच्छा होगा।”

वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बढ़ी चर्चा

ट्रंप के मुताबिक, उन्हें जवाब मिला, “नहीं, नहीं, हम मदद नहीं करेंगे,” हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्होंने किससे बात की। ट्रंप ने कहा कि अब जब अमेरिका युद्ध जीत चुका है, तो नाटो देश उनसे मिलने और मदद की पेशकश करने आ रहे हैं।उन्होंने कहा, “वे बुधवार को मुझसे मिलने आ रहे हैं,” और अब “अचानक” मदद भेजना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा, “जापान ने हमारी मदद नहीं की, ऑस्ट्रेलिया ने मदद नहीं की, दक्षिण कोरिया ने मदद नहीं की, और फिर नाटो उसने भी मदद नहीं की।”

अमेरिका ने जापान में 50,000 और दक्षिण कोरिया में 45,000 सैनिक तैनात कर रखे हैं, ताकि इन देशों को खतरों से बचाया जा सके। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ “बहुत अच्छे” संबंध हैं।उन्होंने दोहराया, “दक्षिण कोरिया ने मदद नहीं की, ऑस्ट्रेलिया ने मदद नहीं की, जापान ने मदद नहीं की।”

ट्रंप ने कहा कि 45,000 अमेरिकी सैनिक परमाणु हथियारों से लैस किम जोंग उन के बिल्कुल पास तैनात हैं, “जो कभी नहीं होना चाहिए था।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर एक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपना काम सही तरीके से किया होता, तो किम जोंग उन के पास परमाणु हथियार नहीं होते, हालांकि उन्होंने उस राष्ट्रपति का नाम नहीं लिया।

असमर्थ घोषित होने पर राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है

ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और नाटो के बीच बढ़ती दूरी की शुरुआत ग्रीनलैंड मुद्दे से हुई। उन्होंने कहा, “अगर आप सच्चाई जानना चाहते हैं, तो यह सब ग्रीनलैंड से शुरू हुआ।” ट्रंप ने कहा, “हम ग्रीनलैंड चाहते हैं। वे हमें देना नहीं चाहते। और मैंने कहा अलविदा।”

इस बीच, ट्रंप ने ईरान युद्ध खत्म करने के लिए समझौता न होने पर आपत्तिजनक भाषा को लेकर हो रही अपनी आलोचनाओं को खारिज कर दिया। ट्रंप से सोमवार को जब ‘क्रेजी बास्टर्ड्स’ जैसे अपशब्द इस्तेमाल करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मुझे आलोचकों की परवाह नहीं है।

ट्रंप की मानसिक स्थिति की जांच कराने की आलोचकों की मांग पर उन्होंने कहा, “मैंने ऐसा कुछ नहीं सुना।” उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है, तो “आपको मेरे जैसे और लोगों की जरूरत है।” उन्होंने कहा, “क्योंकि मेरा देश कई सालों तक व्यापार और हर चीज में ठगा जा रहा था, जब तक मैं नहीं आया। अगर ऐसा है, तो आपको मेरे जैसे और लोगों की जरूरत पड़ेगी।”

ईस्टर संडे के मौके पर किए गए ट्रंप के आपत्तिजनक पोस्ट की आलोचकों ने कड़ी निंदा की और इसे “घृणित” बताया। कुछ लोगों ने उनके मंत्रिमंडल से 25वें संशोधन को लागू करने की मांग की, जिसमें यह प्रावधान है कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ घोषित होने पर राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है। (भाषा)

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