ट्रंप की अतृप्त तेलेच्छा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को इंटरव्यू देते हुए एक बार फिर साबित कर दिया कि उनकी सबसे पसंदीदा चीज़ है- तेल। ईरान का तेल लेना… सच कहूँ तो मेरी सबसे पसंदीदा चीज़ है, उन्होंने बेझिझक कहा। फिर थोड़ा रुककर, जैसे कोई बच्चा खिलौने की माँग कर रहा हो, जोड़ा, लेकिन अमेरिका में कुछ बेवक़ूफ लोग पूछते हैं कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? ईरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात के स्रोत खार्ग द्वीप पर कब्ज़े की संभावना पर बोले, हो सकता है हम इसे लें, हो सकता है नहीं लें… लेकिन हम इसे बहुत आसानी से ले सकते हैं।

ट्रंप का यह बयान ईरान पर अमेरिका-इजराइल हमलों के एक महीने बाद मध्य पूर्व में धधकती युद्ध की आग के बीच आया है, जबकि तेल कीमत की लपटें आसमान छू रही हैं। ट्रंप की अतृप्त तेलेच्छा से जन्मी यह कुंठा इतनी खुली और बेशर्म है कि पुराने साम्राज्यवादी लुटेरों को भी शर्म आ जाए। विडंबना देखिए कि यही ट्रंप महोदय दूसरी ओर दिन-रात युद्ध-विराम की झूठी-सच्ची बातें कर रहे हैं। दावा कर रहे हैं कि पाकिस्तान के ज़रिए बहुत जल्द समझौता होने वाला है। लेकिन उसी साँस में कह रहे हैं कि खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा आसान है।

खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक धुरी

सयाने याद दिल रहे हैं कि खार्ग द्वीप ईरानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। वे इसे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की आय का गला घोंटने का रणनीतिक दाँव बताते हैं। लेकिन ट्रंप को जो चाहिए तो बस चाहिए। अमेरिका फर्स्ट का नारा अब तेल फर्स्ट में बदल चुका है। ईरान चेतावनी दे रहा है कि अमेरिकी सैनिकों पर आग बरसाई जाएगी, लेकिन ट्रंप तो सारी दुनिया को आग के हवाले करने को तत्पर हैं। बस तेल पर कब्जा चाहिए। यह लड़ाई अब पूरी तरह पागलों की लड़ाई में बदल चुकी है और पागलों की कोई नैतिकता नहीं होती।

वैसे ट्रंप एकदम ईमानदारी से कबूल चुके हैं कि विदेश नीति अब तेल की पाइपलाइनों से चलती है, न कि लोकतंत्र, मानवाधिकार या शासन परिवर्तन के खोखले नारों से। इराक युद्ध में मास डिस्ट्रक्शन वेपन्स का बहाना था, आज मेरी पसंदीदा चीज़ का खुला इज़हार। डीलमेकर ट्रंप के लिए डील का मतलब है- लूट! पहले वेनेज़ुएला, अब ईरान। तेल की यह तृष्णा कभी बुझती नहीं। यह नई पीढ़ी के अमेरिकी सैनिकों को युद्ध की भट्टी में झोंकती है। और ट्रंप? वह तो गोल्फ कोर्स पर डील मनाते रहते हैं। उनका प्रिय खेल जो ठहरा।

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भारत समेत दुनिया पर ट्रंप की तेल-तृष्णा का असर

कहना न होगा कि भारत जैसे तेल-आयातक देशों के लिए ट्रंप की यह तेल-तृषा महंगाई की आग बनेगी। पेट्रोल पंप पर लाइनें, उद्योग ठप्प, आम आदमी की जेब खाली! ईरान का आतंकी चरित्र भी खुल कर सामने आ गया है। हूती विद्रोही रेड-सी पर पहले से आतंक मचा रहे हैं। होर्मुज़ स्ट्रेट ईरान के हाथ में है – वैश्विक तेल का गला! इजराइल पागल हाथी, तो ईरान घायल नाग। धरती पर जीवन को संकट में डालने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है? लेकिन ट्रंप को चिंता नहीं। उनके लिए तेल पसंदीदा है, बाकी दुनिया बेवक़ूफ।

निष्कर्षत हमारे समय का सबसे बड़ा सच यह है कि ट्रंप तेल के सबसे बड़े दीवाने हैं। अपनी मोहब्बत को हासिल करने के लिए वे सारी दुनिया को सचमुच फूंकने पर आमादा हैं। यह साम्राज्यवाद का नया संस्करण है। पहले सम्राट तलवार से लूटते थे, अब डील ही तलवार है। सवाल यह नहीं कि तेल मिलेगा या नहीं। सवाल यह है कि इस विकृत तृष्णा की खातिर कितना खून बहेगा, कितनी आग बहेगी। ट्रंप की यह अतृप्त तेलेच्छा न सिर्फ ईरान के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक क्रूर मज़ाक है – जिसका अंत त्रासद ही होगा!

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