आरटीसी निजीकरण पर विधानसभा में सरकार को घेरेंगे : हरीश राव
हैदराबाद, भारत राष्ट्र समिति (भारास) विधायक दल के उपनेता टी. हरीश राव ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सरकार पर इलेक्ट्रिक बसों की आड़ लेकर तेलंगाना सरकार राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) का निजीकरण करने के प्रयास करने का आरोप लगाया और कहा कि निगम में अपाइंटेड डे तक सरकार घोषित नहीं करके अन्याय कर रही है।
हरीश राव ने टीजीएसआरटीसी ज्वाइंट ऐक्शन कमेटी (जेएसी) नेताओं के साथ मिलकर आरटीसी कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा की और 16 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में कर्मचारियों की समस्याओं से सरकार को अवगत कराकर परिष्कार करने के लिए दबाव बनाने का आश्वासन दिया। उन्होंने सरकार पर आरटीसी के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया और तुरंत ही बकाए की 2,804 करोड़ रुपये राशि अदा करने तथा निजीकरण का विचार त्यागने की माँग की।
हरीश राव ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव सरकार के दौरान आरटीसी का सरकार में विलय कर दिया गया था, लेकिन अभी तक कांग्रेस सरकार ने अपाइंटेड डे तक की घोषणा नहीं की है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीसी कर्मचारियों को पदोन्नतियां नहीं मिल पा रही हैं, रोजगार सुरक्षा नहीं है, रिटायरमेंट बेनिफिट तक प्राप्त नहीं हो रहे हैं, सरकार ने सब भुला दिया है।
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आरटीसी विलय की मांग को लेकर कर्मचारी आंदोलनरत
हरीश राव ने कहा कि आरटीसी कर्मचारी एक ओर संस्था के सरकार में विलय की प्रक्रिया पूरी करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस सरकार निगम के एक-एक विभाग का निजीकरण करने पर तुली है, जो शोचनीय है। उन्होंने सरकार की पोल खोलते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकार ने आरटीसी में इलेक्ट्रिक बसें प्रारंभ कीं और इन्हें तैयार करने के कार्य रियायतें देकर निजी हाथों में सौंप दिए, वहीं निजी कंपनियों के साथ 2 हजार बसें वितरण के लिए समझौता कर लिया।
हरीश राव ने आरोप लगाया कि बिजली की बसों की आड़ लेकर निगम को निजीकरण की राह पर सरकार ले जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी सीधे आरटीसी को मिले और आरटीसी खुद बसें खरीदे लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। हरीश राव ने कहा कि महिलाओं को आरटीसी बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा योजना के अंतर्गत बसों में जीरो टिकट अमल के लिए हर महीने 350 करोड़ रुपये देने का वादा सरकार ने किया था, लेकिन नाम के वास्ते कुछ पैसा देकर हाथ झटक रही है।
हरीश राव ने कहा कि पैसा नहीं मिलने के चलते आर्थिक रूप से आरटीसी कमजोर होने लगी है। आरटीसी कर्मचारियों को पीआरसी अब तक लंबित है। वर्ष 2025 की पीआरसी तक नहीं दी गई है जिसके चलते कर्मचारी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से आरटीसी का अपाइंटेड डे तुरंत ही घोषित करने की मांग की।
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