ईश्वर से क्या माँगूँ

ईश्वरीय कृपा होने पर आपको अलग-अलग भौतिक वस्तुएं मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। गाड़ी, बंगला, धन, दौलत, संपदा, जीवन-साथी सब कुछ स्वतः ही आपको प्राप्त होगा, साथ ही मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होगा। ईश्वरीय कृपा होने पर आपक मांगने की आवश्यकता नहीं दौलत, संपदा, जीवन-साथी स होगा, साथ ही मोक्ष का लोग धार्मिक स्थलों पर जाते हैं, तो ईश्वर से ईश्वर को छोड़कर सब कुछ मांगने का प्रयास करते हैं।

कोई गाड़ी मांगता है, तो कोई बंगला मांगता है, कोई अच्छा जीवन-बड़ी साथी तो कोई अपार धन-दौलत, परन्तु बिरले ही होते हैं, जो इन सांसारिक वस्तुओं को न मांगकर ईश्वर को पाने की कामना करते हैं। ईश्वर से क्या मांगा जाए, जिससे आपको सब कुछ मिल जाए, गूढ़ रहस्यों को कथाओं के माध्यम से सरलतापूर्वक समझा जा सकता है। एक राजा था, जिसकी तीन पत्नियां थीं। राजा को तीनों पत्नियों से अत्यन्त प्रेम था।

एक दिन राजा ने तीनों रानियों को बुलाकर कहा, ‘मैं राज्य से बाहर जा रहा हूं, वापसी में तुम लोगों के लिए क्या लेकर आऊँ ?’ एक दिन का समय उन तीनों रानियों को दिया गया कि वे सूची बना लें, उन्हें क्या चाहिए। दूसरे दिन तीनों को एक-एक करके बुलाया गया और पूछा गया। पहली रानी ने कहा, ‘मुझे गहने और नौलखा हार चाहिये।’

दूसरी रानी ने कहा, ‘मुझे देश-विदेश के परिधान, वस्त्र चाहिए।’ तीसरी रानी ने कहा, ‘हे राजन! मुझे कोई वस्तु नहीं चाहिए, न गहने, न वस्त्र, न परिधान। मुझे तो केवल आप चाहिए, मैं आपसे आपको ही मांग रही हूं। आपसे अभाव में मेरी तृप्ति न होगी।’ राजा उसके प्रेम-भाव को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुआ। जब राजा ने स्वयं को उस रानी को समर्पित किया, तो जाहिर सी बात है, राज्य की समस्त संपदा तीसरी रानी को ही प्राप्त हुई।

इसी तरह भक्त अगर ईश्वर से ईश्वर को ही मांगेंगा तो उसको सब कुछ अपने आप ही मिल जाएगा। हम सभी जानते हैं कि काल में महाभारत दुर्योधन ने भगवान श्रीकृष्ण की नारायणी सेना और अर्जुन ने श्रीकृष्ण को प्राप्त किया। अर्जुन जानता था कि स्वयं ईश्वर जिसके साथ है, उसे सफलता, सिद्धि, विजयश्री स्वतः ही मिल जाती है। एक सरल सब सरल, सब सरल सब जाओ। अगर भगवान को साध लिया, तो सब कुछ अपने आप सध जाएगा।

जिसके साथ ईश्वर होते हैं, उसे जीवन के संघर्षों में सफलता अर्जुन की तरह प्राप्त होती है। अगली बार जब भी आप मंदिर में ईश्वर के सामने जाएं तो ईश्वर से केवल ईश्वर को ही मांगें। ईश्वरीय कृपा होने पर आपको अलग-अलग भौतिक वस्तुएं मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। गाड़ी, बंगला, धन, दौलत, संपदा, जीवन-साथी सब कुछ स्वतः ही आपको प्राप्त होगा, साथ ही मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

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