विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस : ऑनलाइन उपभोक्ता सुविधा, संकट और अधिकार

कुल मिलाकर देखें तो ऑनलाइन उपभोक्ताओं को आज ऑफलाइन उपभोक्ताओं से ज्यादा सुविधाएं हासिल हैं। यही कारण है कि तमाम शहरों और कस्बों से लेकर बड़े महानगरों तक आज ऑनलाइन उपभोक्ताओं का बोलबाला है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऑनलाइन उपभोक्ता हर समय फायदे में ही होते हैं। ऑनलाइन उपभोक्ताओं की अपनी भी कई तरह की समस्याएं हैं।
कैसे कम हों ऑनलाइन उपभोक्ताओं की समस्याएं?
ऑनलाइन उपभोक्ताओं की समस्याएं इसलिए भी काफी ज्यादा हैं, क्योंकि ज्यादातर ऑनलाइन उपभोक्ता, उपभोक्ता नियमों और कानूनों से अंजान हैं तथा डिजिटल तकनीक के मामले में भी वो सुशिक्षित या प्रशिक्षित नहीं हैं। इसलिए अगर ऑनलाइन उपभोक्ताओं को अपनी रोजमर्रा की परेशानियों से बचना है, तो उन्हें अपने को कुछ इस तरह की सावधानियों से भी सुसज्जित करना होगा।
- मसलन-
- केवल भरोसेमंद वेबसाइटों से ही खरीदारी करनी होगी।
- अंजान लिंक या मैसेज को खोलने के लालच से बचना होगा।
- उत्पादों की गलत रेटिंग और रिव्यू की ऑनलाइन यानी सार्वजनिक रूप से न सिर्फ आलोचना करनी होगी बल्कि ऐसे गलत रिव्यू लिखने वालों को कानूनी रूप से सबक सिखाने के लिए भी दबाव बनाना होगा।
- भुगतान के लिए हमेशा सुरक्षित माध्यमों का इस्तेमाल करना होगा। अगर देश के ऑनलाइन उपभोक्ता इन सजगताओं का ध्यान रखते हैं, तो काफी हद तक उनकी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
अधिकारों और सुरक्षा को लेकर अब भी कई चुनौतियां
हर साल 15 मार्च को पूरी दुनिया में विश्व उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है। जो केवल खरीद-फरोख्त की गतिविधियों का उत्सवभर नहीं होता बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को याद दिलाने का एक बड़ा अवसर होता है। क्योंकि सदियों से दुनिया में उपभोक्ता रहे हैं, मगर पिछले दो से तीन दशकों में पूरी दुनिया में सबसे बड़े उपभोक्ता वर्ग के रूप में ऐसे लोग उभरे हैं, जो 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध और 21वीं शताब्दी के शुरुआती दशकों जैसे पहले कभी नहीं रहे।
जी हां, हम ऑनलाइन उपभोक्ताओं की बात कर रहे हैं, जो बिना दुकान या बाजार गये अपने मोबाइल फोन के क्लिक के जरिये ही दुनियाभर में खरीदारी करते हैं। आज दुनिया में सबसे ज्यादा ऑनलाइन उपभोक्ता ही हैं। परचेजिंग ताकत के हिसाब से देखें तो ऑनलाइन उपभोक्ता आज दुनिया की तीसरी महाशक्ति है। सवाल है उपभोक्ताओं के इतने बड़े और ताकतवर दौर में क्या उनकी अपनी भी कुछ समस्याएं या कुछ संकट हैं? भले हमें लगता हो कि आज दुनिया में सबसे ज्यादा आर्थिक रूप से स्वतंत्र और ताकतवर उपभोक्ता, ऑनलाइन उपभोक्ता हैं, लेकिन अधिकारों के मामले में ये काफी सताये हुए हैं।
भारी विकल्प और प्रतिस्पर्धा से मिलती सस्ती खरीदारी
ऑनलाइन खरीदारी का चलन तो तेजी से बढ़ा है, लेकिन ऑनलाइन खरीदारी में सीधे-सीधे कोई क्षेत्र विशेष का दबदबा नहीं है। विश्व उपभोक्ता दिवस पर इन ऑनलाइन उपभोक्ताओं की समस्याओं पर प्रकाश डालना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इस दौर के यही सबसे बड़े और मूलभूत उपभोक्ता हैं, जो दिनोंदिन आने वाले समय में और बढ़ेंगे। आज महज मोबाइल के कुछ बटनों पर क्लिक कर देने भर से दुनिया के कोने-कोने से हम अपने घर में बैठे ही मनचाही खरीदारी कर लेते हैं। इससे न केवल समय और श्रम की बचत होती है बल्कि खुद के जोखिम में भी कटौती होती है।
ऑनलाइन उपभोक्ताओं के पास इतने ज्यादा विकल्पों की भरमार और भारी प्रतिस्पर्धा के कारण कम से कम दर पर चीजों को पाने की सुविधा होती है। वहीं ऑनलाइन उपभोक्ता तमाम सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने के दावों के बावजूद सुरक्षित नहीं हैं। दुनिया में आज ऑनलाइन उपभोक्ता ठगी का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। 60 फीसदी से ज्यादा ऑनलाइन बैंकिंग और दूसरे माध्यमों से ये इस तरह की ठगी का शिकार बन रहे हैं। जैसे पोताओं द्वारा फर्जी वेबसाइट बना लेना, सोशल मीडिया पेज के जरिये खरीदारी करना। ऐसे भ्रष्टाचार के सबसे ज्यादा शिकार ऑनलाइन उपभोक्ता ही होते हैं।
फर्जी उत्पाद, रिटर्न और रिफंड में बढ़ती परेशानी
भारत में पिछले तीन सालों में 15 से 16 अरब रुपये की ठगी सिर्फ ऑनलाइन उपभोक्ताओं को या उनके बहाने से हुई है। ऑनलाइन उपभोक्ता के लिए ये बड़े-बड़े विज्ञापन तैयार किए जाते हैं, जो भले ही रचनात्मक ढंग से उपभोक्ताओं को आकर्षित करते हों, लेकिन हकीकत यह है कि यही उपभोक्ता सबसे ज्यादा फर्जीवाड़े का शिकार होते हैं। गलत या खराब उत्पादों को बदलवाने में तो इन्हें दिक्कतों का सामना करना ही पड़ता है, रिटर्न और रिफंड हासिल करना भी बड़ा मुश्किल भरा काम बन गया है।
ऑनलाइन खरीदारी करते समय उपभोक्ता अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे फोन, पता और बैंक डिटेल पोता को देते हैं, लेकिन उपभोक्ताओं के पास इस भरोसे का कोई आधार नहीं है कि उसके निजी डेटा का पोता के द्वारा दुरुपयोग नहीं होगा। अकसर ऑनलाइन उपभोक्ताओं के डेटा भी पोताओं द्वारा अगले पोताओं को बेच दिए जाते हैं। जहां तक भारत के ऑनलाइन उपभोक्ताओं की परेशानियों का सवाल है, तो हमारे यहां ऑनलाइन उपभोक्ताओं की शिकायतें ये सब तो हैं ही, इसके अलावा कुछ और भी हैं। हालांकि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को हर साल कई-कई लाख शिकायतें मिलती हैं, जो ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ी होती हैं।
भारतीय ऑनलाइन उपभोक्ताओं की प्रमुख शिकायतें ये हैं-
- देर से डिलिवरी।
- रिफंड में बेमतलब की देरी और आनाकानी करना। विज्ञापनों में दिखाये या बताये गये उत्पादों की वह क्वालिटी न होना, जिसके दावे किये गये होते हैं। वारंटी की लगातार समस्याओं से जूझना। गलत बिलिंग की समस्या।
इस तरह देखें तो भारतीय ऑनलाइन उपभोक्ताओं की समस्याएं और ज्यादा हैं। डिजिटल बाजार में उपभोक्ता और कंपनी के बीच सीधा संपर्क कम होता है, इसलिए उपभोक्ता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी हो जाता है। भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत ऑनलाइन खरीदारी को भी उपभोक्ता कानून के दायरे में तो लाया गया है तथा ई-कॉमर्स कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है, साथ ही उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज करने का स्पष्ट अधिकार भी मिला हुआ है। बावजूद इस सबके ऑनलाइन उपभोक्ताओं की समस्याएं किसी भी तरह कम होने का नाम नहीं ले रहीं। आज भी ऑनलाइन उपभोक्ता उन्हीं समस्याओं से जूझ रहे हैं, जो समस्याएं कई साल पहले हुआ करती थी।
-लोकमित्र गौतम
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