ओ माँ दुर्गे !
ओ माँ दुर्गे! मैंने लगा दी अर्जी
स्वीकार करो, न करो तुम्हारी मर्जी
अगर मिल जाए, मैया साथ तुम्हारा
हो जाएगा उजियारा ही उजियारा।
विलंब न करो चिंतन में जगदम्बिका,
त्वरित वर दे दो माँ कालिका।
तुम्हारे सहारे कोसों चल पाऊँगा,
कृपा बिन तुम्हारे कुछ ना कर पाऊँगा।
ओ मेरी प्यारी महिषासुरमर्दिनी मैया!
ओ मेरी न्यारी सर्वदानवघातिनी मैया!
आज के असुरों का भी कर दो सफाया
बदल दो भू के उजड़ते चमन की काया।
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चल रहे समर को रुकवा दो माँ भवानी
युद्ध की विभीषिका से बचा लो शिवानी।
जगत की डोर तुमरे हाथों में है परमेश्वरी
जीवन, संतानों का तुम्हारे हस्तों में महेश्वरी
ममता लुटाती रहना पल-पल मां नारायणी
उद्धार करती रहना सभी का माँ कल्याणी
अविलंब आ ही जाओ अब तो माँ अंबिका,
कुटिलों को सबक सिखा ही दो माँ चंडिका।
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