दल-बदलू विधायकों को अदालती नोटिस

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बुधवार को दल-बदलने वाले विधायक टी. प्रकाश गौड़, ए. गांधी, तेल्लम वेंकट राव, बंड्ला कृष्णा मोहन रेड्डी, काले यादय्या, दानम नागेन्दर, पोचारम श्रीनिवास रेड्डी को नोटिस जारी की, जो भारास से कांग्रेस में शामिल हुए थे। अदालत ने उन्हें दल-बदल मामले में पूर्ण विवरण के साथ प्रतियाचिका दायर करने का आदेश दिया। गौरतलब है कि भारास विधायक कल्वाकुंट्ला संजय, के.पी. विवेकानंद, पल्ला राजेश्वर रेड्डी, चिंता प्रभाकर, पौडी कौशिक रेड्डी और जी. जगदीश रेड्डी ने भारास से कांग्रेस में शामिल होने वाले इन विधायकों के खिलाफ दायर याचिका को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा खारिज कर दिए जाने को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

इन याचिकाओं पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने आज पुन सुनवाई की। सुनवाई के दौरान भारास की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गंड्रा मोहन राव ने दलील देते हुए कहा कि भारास से चुनाव जीतने के बाद ये विधायक मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के समक्ष कांग्रेस में शामिल हुए और मुख्यमंत्री ने उन्हें कांग्रेस का खंडवा पहनाया था, जिसका टीवी पर लाइव प्रसारण भी किया गया। दूसरे दिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और समाचार-पत्रों में यह समाचार प्रसारित किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में शामिल होने के बाद इन विधायकों ने कई सरकारी कार्यक्रमों में भाग लिया। इतने सारे सबूतों के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें नजरअंदाज किया और याचिका खारिज कर दी।

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दानम नागेन्दर ने कांग्रेस टिकट पर सिकंदराबाद चुनाव लड़ा

मोहन राव ने आगे कहा कि लगभग सभी याचिकाओं पर उसी दिन फैसला सुनाया गया था और बाद में नाम बदलने के अलावा और कुछ नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि दानम नागेन्दर ने तो कांग्रेस पार्टी के टिकट पर सिकंदराबाद संसदीय क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा। उन्होंने कहा कि दूसरे विधायक पोचारम श्रीनिवास रेड्डी को सरकारी सलाहकार का पद भी दिया गया था। उन्होंने कहा कि पूरे सबूत पेश करने के बावजूद भी याचिका खारिज कर दी गई।

मोहन राव ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने पार्टी छोड़ने वालों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर एक साल तक जवाब भी नहीं दिया और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही इन विधायकों को नोटिस जारी किए गए। क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका के लिए एक डेडलाइन तय की थी। इसके बाद ही विधानसभा अध्यक्ष ने याचिकाओं पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जारी फैसले की प्रति अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है।

दलील सुनने के पश्चात खण्डपीठ ने 7 प्रतिवादी विधायकों को नोटिस जारी की। इसके साथ ही खण्डपीठ ने याचिकाकर्ताओं को रजिस्टर पोस्ट से पर्सनल नोटिस भेजने की मंजूरी दी। इसके साथ ही खण्डपीठ ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि इस याचिका को दानम नागेन्दर के खिलाफ पहले से ही लम्बित याचिका के साथ अटैच किया जाए। इसके बाद मामले की सुनवाई 16 अप्रैल तक स्थगित कर दी गई।

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