कस्तूरबा विद्यालयों में 100 करोड़ का घोटाला : दासोजू श्रवण

हैदराबाद, बीआरएस एमएलसी डॉ. दासोजू श्रवण ने शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) के लिए बंकर बेड की खरीद में 100 करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक धनराशि की हेराफेरी की गई है। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय के विधि छात्रों के लिए आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की ओर भी इशारा करते हुए अधिकारियों की लापरवाही और कांग्रेस सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।

मंगलवार को तेलंगाना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बीआरएस एमएलसी दासोजू श्रवण ने कहा कि केजीबी विद्यालयों के के लिए लगभग 45,360 बंकर बेड प्रति इकाई 35,830 रुपये की दर से खरीदे गए, जिससे कुल लागत लगभग 160 करोड़ रुपये तक पहुँच गई। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार के बेड पहले स्थानीय एमएसएमई इकाइयों द्वारा 12,000 से 15,000 रुपये में आपूर्ति किए जाते थे, जिससे राज्य के खजाने पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

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स्टील वजन घटा, फिर भी कीमत तीन गुना बढ़ी

बीआरएस एमएलसी ने मूल्य निर्धारण संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि नवीनतम टेंडर में प्रति बेड स्टील की मात्रा लगभग 95 किलोग्राम से घटाकर 75 किलोग्राम कर दी गई है। जब सामग्री का वजन कम हुआ है तो लागत घटनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय यह तीन गुना बढ़ गई। डॉ. श्रवण ने आरोप लगाया कि पात्रता मानदंडों में हेरफेर कर स्थानीय निर्माताओं को दरकिनार किया गया और सत्तारूढ़ दल के नेताओं से जुड़ी कुछ विशेष कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया।

केजीबीवी को समग्र शिक्षा अभियान योजना के तहत केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में वित्तपोषित किया जाता है, इसलिए यह मामला राष्ट्रीय करदाताओं के धन से जुड़ा है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और बंडी संजय से सीबीआई एवं सीवीसी जांच की मांग करने का आग्रह किया तथा टेंडर प्रक्रिया की न्यायिक जांच की भी मांग की। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं पर भी चिंता जताई।

साथ ही आरोप लगाया कि विधि के दो अलग-अलग एक पांच वर्षीय कार्यक्रम और दूसरा तीन वर्षीय पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं क्रमशः 25 फरवरी और 27 फरवरी को आयोजित की गईं, जिनके प्रश्न पत्र समान थे। इसे प्रशासनिक विफलता का प्रमाण बताते हुए श्रवण ने सरकार पर शिक्षा क्षेत्र के कुप्रबंधन का आरोप लगाया और अलग-अलग तिथियों पर आयोजित दो विधि पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं में एक ही प्रश्न पत्र तैयार करने के मामले की जांच की भी मांग की।

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