136वीं जयंती व 121वाँ दीक्षा दिवस समाज सुधारक श्री शांति सूरिश्वर महाराज
गुरुदेव श्रीशान्तिसूरीश्वर का जन्म वि.सं. 1946 की वसंत पंचमी को हुआ। माता वसुदेवी की कोख से जन्म लेते ही उनमें वैराग्य और आत्म-चेतना के बीज दिखे। संसार के प्रति उनमें बचपन से ही स्वाभाविक उदासीनता और आत्मनिष्ठा स्पष्ट थी।
गुरुदेव ने मात्र 16 वर्ष की आयु में अपने काका श्रीतीर्थविजय महाराज के सान्निध्य में रामसीन गाँव में 9 फरवरी 1905 को दीक्षा ग्रहण की और पूर्णत साधना, त्याग और तपस्या में समर्पित हो गए।
गुरुदेव का व्यक्तित्व सरल, तेजस्वी और करुणामयी था। उनकी महानता उनकी स्नेहपूर्ण और सबका कल्याण चाहने वाली वृत्ति में निहित थी। वे अनेक भाषाओं में पारंगत थे। शिष्यों को अलग-अलग स्थानों पर उनके दर्शन की अनुभूति होती थी, जो उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति की गहनता का संकेत है। गुरुदेव का संदेश सादा और व्यवहारिक रहा। वे कहते थे- शराब-दारू का सेवन न करें। मांसाहार त्याग करें। पानी छानकर ही पिएँ।
सेवा, करुणा और अहिंसा से समाज परिवर्तन का मार्ग
इन निर्देशों में शारीरिक स्वच्छता के साथ संयम, अहिंसा और शुद्ध जीवन-शैली के नैतिक आदर्श निहित हैं। उन्होंने अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद की ज्योति प्रज्वलित की और ग्राम्य जनता में गहरा प्रभाव डाला। गुरुदेव ने दान, दया और करुणा को जीवन का आधार बनाया। उन्होंने अस्पताल खुलवाए, गौ-हत्या रुकवाई और अनाथों तथा निर्धनों की सहायता कराई। उनके उपदेशों से जनता नैतिकता की ओर प्रेरित होने लगी, जिससे उनके व्यवहार में परिवर्तन आने लगा।
गुरुदेव की वाणी मधुर, प्रभावी और हृदयस्पर्शी थी। सुनने वाले सहज ही प्रभावित हो उठते और उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा पाते। आधुनिक जीवन की तेज़ी, असहिष्णुता और भौतिक प्रवृत्तियों में गुरुदेव की अहिंसा आधारित और करुणा प्रधान शिक्षाएँ आज भी मार्गदर्शक हैं। वे सिखाते हैं कि सच्ची महानता सेवा, दया और आत्मानुशासन में निहित है।
उनका जीवन हमें स्मरण कराता है कि अहिंसा केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। गुरुदेव श्री शांतिसूरीश्वर का जीवन त्याग, करुणा और विश्व-कल्याण का जीता-जागता उदाहरण है। उनकी शिक्षाएँ आज भी हमें आत्म-शुद्धि, शांति और मानवता की ओर प्रेरित करती हैं।
उषा जैन पंकज
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



