जीडिमेट्ला की कॉलोनी में अतिक्रमण मुक्त हुए 6 पार्क

हैदराबाद, हैद्रा ने जीडिमेट्ला में एक ही कॉलोनी के 6 पार्क अतिक्रमण से मुक्त कराए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्राणवायु प्रदान करने वाले पार्कों पर हो रहे अतिक्रमण को गंभीरता से लिया जा रहा है। शिकायत मिलते ही हैद्रा की टीम मौके पर पहुँचकर पार्क स्थलों को मुक्त करा रही है। एक ही कॉलोनी में 6 पार्कों को अतिक्रमण से मुक्त कर 2,260 गज भूमि पर फेंसिंग लगायी। वहीं एक अन्य स्थान पर 1,452 गज से अधिक क्षेत्र में फैले पार्क को कब्जे से मुक्त कराया गया। कुल मिलाकर 3,712 गज क्षेत्रफल के पार्क पुन उपलब्ध होने से संबंधित क्षेत्रों में उत्सव का माहौल बन गया।

स्थानीय लोग बड़ी संख्या में बाहर आए और पार्कों को मुक्त कराने के लिए हैद्रा के समर्थन में नारे लगाए। हैद्रा द्वारा लगाए गए बोर्डों के सामने फोटो खिंचवाए और रैलियाँ निकालकर खुशी मनाई। मेड़चल मल्काजगिरी जिले के सुभाष नगर क्षेत्र की भाग्यलक्ष्मी कॉलोनी का लेआउट वर्ष 1968 में 80 एकड़ में 810 प्लॉटों के साथ विकसित किया गया था। इसमें 10 पार्कों के लिए स्थान आरक्षित था।

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जीडिमेट्ला में पार्क स्थल उच्च वोल्टेज लाइन के नीचे बने

जीडिमेट्ला औद्योगिक क्षेत्र को बिजली आपूर्ति के लिए उच्च वोल्टेज लाइन इस लेआउट के ऊपर से गुजरती थी, इसलिए उन लाइनों के नीचे पार्क स्थल चिह्नित किए गए। लगभग 20 वर्ष पूर्व वैकल्पिक लाइन से बिजली आपूर्ति शुरू होने पर उच्च वोल्टेज तार हटा दिए गए। इसके बाद इन पार्क स्थलों पर अतिक्रमण शुरू हो गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए उन्होंने प्रजावाणी में शिकायत दर्ज कराई।

आयुक्त ए.वी. रंगनाथ के निर्देश पर संबंधित विभागों के साथ संयुक्त निरीक्षण कर भूमि को पार्क स्थल के रूप में सत्यापित किया गया। 6 पार्कों से अतिक्रमण हटाकर फेंसिंग की गई और पार्क स्थल दर्शाते हुए बोर्ड लगाए गए। एक अन्य घटना में हैदराबाद जिले के आसिफनगर मंडल के गुडिमल्कापुर में दशकों पूर्व एजी ऑफिस को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के नाम से 10 एकड़ में 83 प्लॉटों का लेआउट विकसित किया गया था। प्लॉट नंबर 79, 80, 81 गड्ढे वाले क्षेत्र में थे। बाद में लेआउट संशोधित कर इन प्लॉट धारकों को अन्य स्थान पर प्लॉट आवंटित कर लगभग 1500 गज क्षेत्र को पार्क के रूप में चिह्नित किया गया।

गड्ढा भरने में देरी होने से यह भूमि अतिक्रमणकारियों के कब्जे में चली गई। एक व्यक्ति वहाँ रेत का व्यापार कर रहा था, दूसरा वाहन पार्किंग के रूप में उपयोग कर रहा था, जबकि एक अन्य नारियल बेच रहा था। स्थानीय निवासियों ने वर्ष 2018 में संरक्षण की माँग की थी, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद प्रजावाणी में शिकायत की गई। आयुक्त ए.वी. रंगनाथ के निर्देश पर जांच कर भूमि को पार्क स्थल के रूप में पुष्टि की गई। शुक्रवार को अतिक्रमणकारियों को हटाकर लगभग 1452 गज क्षेत्र में फेंसिंग की गई और पार्क स्थल का बोर्ड लगाया गया।

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