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हिन्दी मिलाप का 75वाँ वर्ष उत्सव : कहानी संग्रह ‘खुली दराज और बिखरी खुशबुएँ’ पर हुई परिचर्चा

हैदराबाद, हिन्दी मिलाप के 75वें वर्ष उत्सव के उपलक्ष्य में मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में अपर संचालक तथा लेखक संजय जैन के कहानी संग्रह `खुली दराज और बिखरी खुशबुएँ’ पर बशीरबाग स्थित बीकानेरवाला में परिचर्चा का आयोजन किया गया। डेली हिन्दी मिलाप की संपादक विपमा वीर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मंचस्थ अतिथियों ने पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए इसे अनुभवों की सशक्त तथा संवेदनात्मक अभिव्यक्ति बताया।

कौतूहल को बढ़ाती हैं संजय जैन की कहानियां

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तथा पब्लिक रिलेशन काउंसिल आफ इंडिया, हैदराबाद चैप्टर के अध्यक्ष एवं रेलवे अधिकारी शकील अहमद ने कहा कि संजय जैन के कथा संकलन खुली दराज और बिखरी खुशबुएँ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक कहानी को पढ़ने के बाद दूसरी कहानी का कौतूहल बना रहता है। उन्होंने कहा कि इस संग्रह की कहानियों का भाव जगजीत सिंह की गज़ल `ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो…..’ से पाठकों को जोड़ने वाला है। शकील अहमद ने कहानी संग्रह के अन्य भाषाओं के अनुवाद का सुझाव दिया। साथ ही हिन्दी पत्रकारिता में योगदान के 75 वर्षों का उल्लेखनीय सफर तय करने के लिए हिन्दी मिलाप को शुभकामनाएँ दीं।

कहानियों में संवेदना, दृश्यात्मकता और सामाजिक यथार्थ का समन्वय

मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के परामर्शी प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने मुख्य वक्तव्य देते हुए कहानी संग्रह के शीर्षक को अज्ञेय की पंक्तियों `तुम्हारी देह मुझको कनक-चंपे की कली है….दूर से ही स्मरण में भी गंध देती है…’ से जोड़ा। उन्होंने संजय जैन को काव्यात्मक गद्यकार बताते हुए कहा कि इस कहानी संग्रह को पढ़ते समय ललित गद्य के पठन का आनंद आता है। यह लेखक की एक दुर्लभ योग्यता है।

प्रो. शर्मा ने कहा कि संकलन की सभी कहानियों में दृश्यात्मकता के साथ बिंब-प्रतिबिंब तथा प्रस्तुत-अप्रस्तुत का सुंदर समन्वय है। उन्होंने कहा कि लेखक ने जनरशेन गैप, एकाकीपन, बाजारीकरण, स्थानीयता का हास, सांस्कृतिक बदलाव जैसे विषयों से जुड़े अनुभवों को अनुभूति में पकाकर ललित गद्य में ढाला है। प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि आज की आभासी दुनिया में अपने भीतर संवेदना बनाए रखना बहुत आवश्यक है। यह संकलन इसी का एक उदाहरण है।

विशेष अतिथि वेणुगोपाल भट्टड़ ने कहानी संग्रह पर संक्षिप्त विचार रखे। संजय जैन ने लेखकीय वक्तव्य देते हुए कहा कि वह जीवन के छोटे-बड़े सुख-दुःख के बीच विभिन्न प्रकार की विडंबनाओं को समझकर अपनी सृजनात्मकता का हिस्सा बनाना चाहते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में उन्हें अपने समय और समाज के यथार्थ को देखने-समझने तथा व्यक्त करने के लिए कहानी प्रभावी माध्यम लगा। उन्होंने इस कथा संग्रह के माध्यम से प्रयास किया कि अनुभव की अभिव्यक्ति को संवेदना का आधार मिले।

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चयनित कहानियों का पाठ, लेखक संजय जैन का सम्मान

संजय जैन ने खुली दराज और बिखरी खुशबुएँ पर परिचर्चा के आयोजन हेतु हिन्दी मिलाप का आभार व्यक्त किया।
हिन्दी मिलाप के विज्ञापन प्रबंधक प्रकाश जैन ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि डेली हिन्दी मिलाप के गौरवशाली 75वें वर्ष का उत्सव मनाने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इस कड़ी में हिन्दी में लेखन तथा पठन-पाठन को प्रोत्साहन हेतु भोपाल से पधारे कथाकार तथा व्यंग्यकार संजय जैन के कहानी संग्रह खुली दराज और बिखरी खुशबुएँ से परिचित होने और इसकी कुछ कहानियों को सुनने के लिए विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया।

कथा संग्रह खुली दराज और बिखरी खुशबुएँ की कुछ चयनित कहानियों का पठन डॉ. बालाजी, डॉ. सुषमा, डॉ. रउफुद्दीन, डॉ. राजनारायण अवस्थी, एफ एम सलीम तथा श्रद्धा विजयलक्ष्मी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में संजय जैन का सम्मान महेश बैंक के पूर्व चेयरमैन रमेश बंग, श्री दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, इंदौर के रीजनल चेयरमैन सुरेंद्र ठोलिया, सचिव गौतम सेन जैन, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के देवकांत पावर, साहित्यिक संस्था सांझ के साथी एवं अन्य द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में सीएमओ तेलंगाना के अधिकारी जैकब रॉस, दमरे जनसंपर्क अधिकारी राजेश कल्याणा, रेखा ओस्तवाल, नंदगोपाल भट्टड़, नीना शर्मा, रवि बैद तथा कुमुद जैन ने अतिथियों का स्वागत-सम्मान किया। अवसर पर संजय जैन के परिवार के सदस्य, विभिन्न सरकारी संस्थानों, राजभाषा विभाग तथा जनसंपर्क विभाग के अधिकारी, डॉ. रेखा शर्मा, डॉ. संगीता झा, सुनीता लुल्ला, देव कुमार पुखराज व अन्य उपस्थित थे। एफ एम सलीम ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि कहानियाँ मनुष्य को स्मृतियों में टिके रहने देतीं हैं। समापन कुमुद जैन के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

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