महिला दक्षता समिति : संघर्ष, सेवा और सशक्तिकरण की प्रेरणादायी यात्रा
जिस प्रकार किसी बीज में एक वटवृक्ष बनने की क्षमता होती है, उसी प्रकार किसी संकल्प में समाज को रूपांतरित करने की शक्ति निहित होती है। महिला दक्षता समिति शिक्षण संस्थान की यात्रा भी एक ऐसे ही प्रबल संकल्प से प्रारंभ हुई और वह है- बालिकाओं को शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना। यह हैदराबाद के चंदानगर क्षेत्र में स्थित एक प्रतिष्ठित एवं बहुआयामी शिक्षण संस्थान है, जो पिछले 35 वर्षों से बालिकाओं की शिक्षा, कौशल विकास और सशक्तिकरण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दे रही है। इस प्रेरणादायी संस्था की अध्यक्ष शिक्षाविद् डॉ. सरोज बजाज हैं।
स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाली जागरूक, सजग और विचारशील कुछ महिलाओं ने सदियों से चली आ रही सामाजिक कुरीतियों, जैसे- बेमेल विवाह, बाल विवाह, दहेज उत्पीड़न, अशिक्षा, पालन-पोषण में असमान व्यवहार, स्त्रा-भ्रूण हत्या, संयुक्त परिवारों का विघटन आदि को बदलने का दृढ़-संकल्प लिया। गहन चिंतन के पश्चात यह अनुभव किया गया कि महिलाओं के उत्थान के लिए उनका स्वयं का संगठन, मंच और सािढय सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। इसी दूरदर्शी सोच के परिणामस्वरूप वर्ष 1977 में एक स्वयंसेवी संस्था महिला दक्षता समिति का गठन हुआ।
इस समिति में तत्कालीन प्रबुद्ध, शिक्षित एवं समाजसेवी महिलाओं ने सदस्यता ग्रहण की। समय के साथ यह संस्था केवल एक संगठन नहीं रही, बल्कि देशव्यापी आंदोलन का स्वरूप लेती चली गई। श्रीमती सुमन कृष्णकांत (वर्तमान महिला दक्षता समिति की अखिल भारतीय अध्यक्ष) के नेतृत्व में देहज विरोधी, उपभोक्ता व परिवार कल्याण उप-समितियों का गठन किया गया। आप नारी उत्थान व सशक्तिकरण के लिए एक्टिविस्ट की तरह आज भी समर्पित हैं। महिला दक्षता समिति का मूल उद्देश्य महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार, आत्मनिर्भरता तथा स्त्रा-शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना है। विशेष रूप से कमजोर एवं ग्रामीण वर्ग की बालिकाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना संस्था की प्राथमिकता रही है।
सुमन निलयम हॉस्टल : शिक्षा की पहली सीढ़ी
इस विश्वास के साथ कि किसी भी कारण से कोई बेटी शिक्षा से वंचित न रह जाए, सर्वप्रथम छात्राओं के लिए आवास की परिकल्पना की गई। तत्कालीन आंध्रप्रदेश सरकार द्वारा चंदानगर में लगभग 3 एकड़ भूमि अनुदान स्वरूप प्रदान की गई।
तेलंगाना/आंध्रप्रदेश की अध्यक्ष डॉ. सरोज बजाज एवं उनकी कर्मठ सहयोगी बहनों के निरंतर प्रयासों से चंदानगर में कार्यरत महिलाओं एवं छात्राओं के लिए सुमन निलयम हॉस्टल की आधारशिला 28 अप्रैल, 1993 को तत्कालीन राज्यपाल कृष्णकांत द्वारा रखी गई। इस पुनीत कार्य में तत्कालीन मुख्यमंत्री के. विजय भास्कर रेड्डी की सहभागिता भी रही। लगभग एक वर्ष में निर्माण पूर्ण होने के पश्चात 2 अप्रैल, 1994 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव ने हॉस्टल का उद्घाटन किया।
सुमन जूनियर कॉलेज : ग्रामीण बालिकाओं के सपनों को पंख
ग्रामीण क्षेत्रों में प्राय बालिकाओं की शिक्षा दसवीं कक्षा के बाद रोक दी जाती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सुमन जूनियर कॉलेज की स्थापना की गई। इस कॉलेज का उद्घाटन 13 जुलाई, 2002 को तत्कालीन राज्यपाल डॉ. सी. रंगराजन द्वारा किया गया, जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने की। यहाँ एम.पी.सी., बी.पी.सी., एम.ई.सी., सी.ई.सी. पाठ्यक्रम तेलुगु एवं अंग्रेज़ी माध्यम में संचालित किए जा रहे हैं।
वी.डी. बजाज डिग्री कॉलेज
उच्च शिक्षा के विस्तार हेतु 9 जुलाई, 2005 को वी.डी. बजाज डिग्री कॉलेज (उस्मानिया विश्वविद्यालय से संबद्ध) का उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल सुशील कुमार शिंदे द्वारा किया गया। यहाँ बी.कॉम (कंप्यूटर्स) एवं बी.एस.सी. (एम.एस.सी.एस.) जैसे रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम संचालित हैं।
वोकेशनल जूनियर कॉलेज
व्यावसायिक दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 7 जून, 2010 को वोकेशनल जूनियर कॉलेज का उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल ई.एस.एल. नरसिम्हन द्वारा किया गया। इस कॉलेज में एम.पी.एच.डब्ल्यू. (नर्सिंग), फिजियोथेरेपी, मेडिकल लैब तकनीशियन एवं कंप्यूटर साइंस जैसे पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।



नर्सिंग शिक्षा की नई दिशा
24 दिसंबर, 2016 को महिला दक्षता समिति एवं बंसीलाल मालानी कॉलेज ऑफ नर्सिंग का विधिवत उद्घाटन भारत के महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के करकमलों द्वारा हुआ। नर्सिंग छात्राओं हेतु वी.बी. बजाज हॉस्टल की स्थापना 10 जनवरी, 2020 को तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन द्वारा की गई। 14 जून, 2025 महिला दक्षता समिति शिक्षण संस्थान में बीबीए कोर्स का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में तेलंगाना की प्रथम महिला श्रीमती सुधा देव वर्मा किया गया। इस समारोह में विशिष्ट अतिथि डॉ. वी. एस. अलगु वर्षिणी (आईएएस) एवं सम्माननीय अतिथि मनीषा साबू (हेड, इंफोसिस फाउंडेशन) उपस्थित रहीं।
इस समय छात्राओं की सुविधा हेतु 1,15,000 स्क्वेयर फीट में फैले स्व. श्रीमती निर्मला गोयंका छात्रावास का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। शिक्षण संस्थान में कौशल विकास कार्यशालाएँ, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता कार्पाम, डिजिटल साक्षरता अभियान, करियर मार्गदर्शन सत्र, योग, पेंटिंग तथा आत्मरक्षा जैसे प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। संस्थान की छात्राएँ प्रति वर्ष राज्य स्तर पर शीर्ष रैंक प्राप्त करती हैं। अनेक छात्राओं को योग्यता छात्रवृत्तियाँ भी प्राप्त हो रही हैं। कई छात्राएँ आज भारत के सरकारी एवं निजी संस्थानों में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, सिंगापुर, स्वीडन, जापान जैसे देशों में भी अपनी सेवाएँ दे रही हैं।
संस्थान में हिन्दी प्रचार सभा, हैदराबाद के माध्यम से हिन्दी शिक्षण कक्षाएँ चलाई जाती हैं, जिससे भारतीय भाषाई मूल्यों का संरक्षण होता है। यहाँ का शिक्षण स्टाफ अनुभवी, उत्साही और उच्च योग्यताओं से युक्त है और शिक्षण के प्रति समर्पित है। भविष्य की योजनाओं में एम.एस.सी. नर्सिंग नए पाठ्यक्रमों की योजना भी प्रस्तावित है।
निष्कर्षत:

तीन दशकों की यह यात्रा केवल एक शिक्षण संस्थान की नहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल है। यह संस्था छात्राओं को ज्ञान देने के साथ-साथ सम्मान, स्वावलंबन और संस्कार भी प्रदान करती है। डॉ. सरोज बजाज का स्वप्न है कि महिला दक्षता समिति शिक्षण संस्थान भविष्य में एक मिनी यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित हो।
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