सामाजिक न्याय और समान अवसर के लिए प्रतिबद्ध सरकार : भट्टी विक्रमार्का
हैदराबाद, उप मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का मल्लू ने कहा कि तेलंगाना सरकार सामाजिक न्याय, गरिमा और सभी के लिए अवसर प्रदान करने के सिद्धांत के साथ काम कर रही है। हर नागरिक को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का समान अधिकार है।





भट्टी विक्रमार्का यहाँ एनटीआर स्टेडियम में चिन्मया मिशन अमृत महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चाहे वह विस्तारित सामाजिक सुरक्षा हो, प्रथम पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हो, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाएँ हों, किसानों और श्रमिकों को सहायता हो, गरीबों के लिए आवास हो या महिलाओं और वंचित वर्गों का सशक्तिकरण, सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही है कि विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
चिन्मया मिशन की सेवा के 75 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि 75 वर्ष केवल समय की गणना नहीं है, बल्कि यह संस्था की प्रासंगिकता और उसकी जीवंतता का प्रमाण है। यह दर्शाता है कि चिन्मया मिशन शाश्वत मूल्यों में निहित रहते हुए भी समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर ढालता रहा है। उन्होंने कहा, आज हम ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ भौतिक प्रगति अभूतपूर्व है।
तकनीक आगे बढ़ रही है, आधारभूत संरचनाएँ विकसित हो रही हैं और अर्थव्यवस्थाएँ विस्तार कर रही हैं, परंतु इसके साथ-साथ हम तनाव, विखंडन, असमानता और सामाजिक विश्वास के क्षरण को भी देख रहे हैं। याद रखना होगा कि मूल्यों के बिना विकास अधूरा है। करुणा के बिना वृद्धि अस्थिर है और समावेशन के बिना प्रगति कमजोर है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं की भागीदारी, युवाओं और बच्चों की सक्रिय भूमिका तथा परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय जैसी वर्चुअल यात्रा यह दर्शाती है कि आध्यात्मिकता स्थिर नहीं है, वह सभी को अपनाने के लिए निरंतर विकसित होती रहती है।
आध्यात्मिक शिक्षा से चरित्र और जिम्मेदार नागरिकता का विकास
यही सच्ची सामाजिक समरसता है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद सदैव संस्कृतियों, आस्थाओं, भाषाओं और विचारों के बीच संवाद का नगर रहा है। चिन्मय मिशन हैदराबाद ने इस परंपरा को सशक्त किया है। कठोरता के बजाय चिंतन को, अंधविश्वास के बजाय जिज्ञासा को और विभाजन के बजाय सौहार्द को प्रोत्साहित कर यह बहुलतावादी और लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करता है। आज हमारे देश को इसकी अत्यंत आवश्यकता है।
सभा को संबोधित करते हुए स्वामी स्वरूपानंद जी ने युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण और सुदृढ़ नैतिक आधार के निर्माण में आध्यात्मिकता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता पर आधारित मूल्य-निष्ठ शिक्षा चरित्र निर्माण, विचारों की स्पष्टता और जिम्मेदार नागरिकता के विकास के लिए अनिवार्य है। चिन्मया मिशन ने सदैव केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि आंतरिक उत्कृष्टता के पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया है।
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समारोह में चिन्मया मिशन हैदराबाद के प्रभारी स्वामी सर्वेशानंद, अध्यक्ष हरीश कुमार, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव तथा चिन्मया अमृत महोत्सव समिति ग्रेटर हैदराबाद के संयोजक एल. वी. सुब्रह्मण्यम, गीर्वाणी रेड्डी, एम. अप्पा राव तथा विभिन्न संगठनों से जुड़े अनेक आध्यात्मिक नेताओं उपस्थित थे।
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