केशव राव के पुत्र की शिकायत पर दर्ज मामले को खारिज करने याचिका दायर
हैदराबाद, सिद्दिपेट ज़िले के कोंडापाका निवासी जी. रघुवीर रेड्डी ने पूर्व सांसद केशव राव के पुत्र के. वेंकटेश्वर राव द्वारा नाम मात्र मूल्य पर भूमि के नियमितीकरण को चुनौती देने वाली झूठी शिकायत के आधार पर दर्ज मामले को रद्द करने का आग्रह करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जे. श्रीनिवास राव ने आज सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ई. उमा माहेश्वर राव ने कहा कि मामला केवल व्हॉट्सऐप संदेशों के आधार पर दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि कोई फोन कॉल नहीं किया गया और न ही कोई धमकी दी गई। जबकि दायर याचिका को वापस लेने के लिए तीन करोड़ रुपये की माँग करने का हवाला देते हुए वेंकटेश्वर राव ने याचिकाकर्ता के खिलाफ झूठी शिकायत की। उन्होंने कहा कि जब शिकायत दर्ज की जाती है, तो उसमें कोई उचित आरोप होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून मैसेज और मनगढ़ंत धमकियों के आधार पर मामला दर्ज करने की अनुमति नहीं देता है।
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तय समय की सुनवाई सूचना मात्र, धमकी का सवाल नहीं उठा
माहेश्वर राव ने कहा कि जनहित याचिका की जाँच से संबंधित एक प्रकाशित समाचार लेख भेजा गया था और समाचार-पत्र में प्रकाशित किसी लेख को भेजना धमकी नहीं है, यह सार्वजनिक सूचना है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें धमकी दी जाती है, तो वे डरेंगे नहीं, व्हॉट्सऐप संदेश में यह धमकी कैसे हो सकती है कि वह उच्च न्यायालय ने भी यही बात दोहराएगा। इसी तरह याचिका की सुनवाई एक निश्चित समय पर होगी, यह संदेश सूचना तो हो सकता है, लेकिन इसमें धमकी कहाँ है।
यदि ऐसी कोई धमकी थी, तो उन्होंने कहा कि अगले दिन पहले न्यायालय कक्ष में हुई सुनवाई के दौरान वे यह बता सकते थे कि याचिकाकर्ता उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा भेजे गए व्हॉट्सऐस संदेश को दिखाकर धमकी देना और अनुमानों के आधार पर आरोप लगाना कानून के अनुसार वैध नहीं है।
वेंकटेश्वर राव की ओर से वरिष्ठ अदिवक्ता प्रभाकर और कृष्णकुमार गौड़ ने दलील देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता की जमीन के नियमितीकरण संबंधी सरकारी आदेशों के खिलाफ दायर जनहित याचिका को वापस लेने के लिए तीन करोड़ रुपये की माँग की गई है। उन्होंने कहा कि व्हॉट्सऐप पर भेजे गए संदेश इसका आधार हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को संदेश भेजने की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि वे उन्हें जानते नहीं हैं और उनसे कोई संपर्क भी नहीं था, और यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। सुनवाई पूरी न होने के कारण न्यायाधीश ने मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी तक स्थगित कर दी।
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