दाई सेवाओं पर तैयार की जाएगी विशेष नीति : दामोदर राजनरसिम्हा
हैदराबाद, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य उच्च सी-सेक्शन दर को कम करते हुए सामान्य प्रसव को प्रोत्साहन देना है। इसके लिए दाई सेवाओं पर विशेष नीति तैयार की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने प्रजा पालना-प्रगति प्रणालिका कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह के दौरान सिकंदराबाद के भोईगुड़ा स्थित सरकारी नर्सिंग कॉलेज में सुरक्षित मातृत्व दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि मातृत्व एक आशीर्वाद है। इस दिशा में चिकित्सा अधिकारियों को जागरूकता अभियान सतत रूप से चलाना चाहिए, ताकि प्रत्येक गर्भवती महिला सुरक्षित और स्वस्थ प्रसव का लाभ उठा सके। उन्होंने कहा कि सरकार महिला केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित कर कर रही है।
सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए दाई सेवाओं पर विशेष नीति तैयार की जाएगी। साथ ही सरकार शिशु मृत्यु दर को एकल अंक तक लाने के लिए प्रभावी कदम उठाएगी। उन्होंने पोषण संबंधी परामर्श को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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सुरक्षित मातृत्व के लिए कम उम्र से स्वास्थ्य जागरूकता जरूरी
चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग सचिव डॉ. क्रिस्टीना चोंगथू ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व के लिए कम उम्र से ही स्वास्थ्य जागरूकता, पोषण और मासिक धर्म स्वच्छता पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्लीनिकों के माध्यम से महिलाओं को विशेष क्रीनिंग सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने राज्य में दाई सेवाओं को अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग की सचिव अनीता रामचंद्रन ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों को व्यापक और बेहतर सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एनीमिया बड़ी समस्या है, इसलिए आरोग्य लक्ष्मी योजना के तहत प्रतिदिन दो लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं को पोषण युक्त आहार प्रदान किया जा रहा है। प्रसवोत्तर माताओं को छह माह तक पोषण युक्त आहार दिया जा रहा है। हमारा प्रयास माताओं एवं बच्चों के लिए उचित पोषण, स्तनपान और शिशु देखभाल संबंधी परामर्श सेवाओं को और मजबूत करना है।
विभाग की आयुक्त संगीता सत्यनारायण ने 99 दिवसीय अभियान के तहत राज्यभर में आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने गर्भवती महिलाओं के पोषण, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, पौष्टिक भोजन और दवाओं के उपयोग से संबंधित प्रदर्शनी स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम से संबंधित ई-लर्निंग मॉड्यूल के एक पोस्टर का अनावरण भी किया। अवसर पर स्वास्थ्य तथा चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय पोषण संस्थान के अधिकारी सहित अन्य उपस्थित थे।
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