2019 से लोकसभा का उपाध्यक्ष का नहीं होना संविधान का उल्लंघन: कांग्रेस

नयी दिल्ली, कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के संकल्प पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किए जाने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू के बयान को लेकर बुधवार को उन पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सदन में 2019 से उपाध्यक्ष का नहीं होना संविधान का उल्लंघन है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि 1954 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जी वी मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा में उस वक्त के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भाग लिया था और विपक्ष को अधिक समय दिए जाने की पैरवी की थी। रीजीजू ने मंगलवार को लोकसभा में कहा था कि बिरला के खिलाफ संकल्प पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किया गया है, जबकि 1954 में इसी तरह के संकल्प पर चर्चा के लिए सिर्फ ढाई घंटे का समय निर्धारित किया गया था।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘कल लोकसभा में अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा में संसदीय कार्य मंत्री ने गर्व से दावा किया कि चर्चा के लिए 10 घंटे आवंटित किए गए हैं, जबकि दिसंबर 1954 में इसी तरह के प्रस्ताव के लिए केवल ढाई घंटे निर्धारित किए गए थे।’ उन्होंने कहा कि रीजीजू यह बताना भूल गये कि 18 दिसंबर 1954 को तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू स्वयं सदन में बैठे थे और चर्चा में भाग लिया था।
489 सांसदों वाले सदन में कांग्रेस के पास 364 सांसद
रमेश ने कहा, ’18 दिसंबर 1954 को बोलते समय, जवाहरलाल नेहरू ने सदन की अध्यक्षता कर रहे उपाध्यक्ष से अनुरोध किया कि ज्यादा समय विपक्ष को आवंटित किया जाना चाहिए। जब 18 दिसंबर 1954 को लोकसभा में प्रस्ताव पेश किया गया, तो 489 सांसदों वाले सदन में कांग्रेस के पास 364 सांसद थे।’
कांग्रेस नेता का कहना है, ’18 दिसंबर 1954 को (जैसा कि बाद में 1966 और 1987 में हुआ था) लोकसभा में अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सभापति की कुर्सी पर एक उपाध्यक्ष थे। 2019 के मध्य से लोकसभा में कोई उपाध्यक्ष नहीं है जो संविधान का स्पष्ट उल्लंघन है।’ (भाषा)
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