कारा के दिशा-निर्देश के आधार पर ही ले सकते हैं दत्तक : कोर्ट

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि जो लोग बच्चों को दत्तक लेना चाहते हैं, उन्हें सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) के दिशा-निर्देश के आधार पर ही दत्तक लेना चाहिए। जो लोग भुगतान कर माता-पिता के पास से हटकर किसी और से बच्चा गोद लेते हैं, उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी जाएगी। उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए दायर याचिका खारिज कर दी कि नियमों के खिलाफ दत्तक लेने को अनुमति नहीं दी जा सकती है, क्योंकि उनमें पालन पोषण को लेकर लगाव होता है।

नलगोंडा ज़िले के सुरारम मंडल निवासी एम. वेंकन्ना ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी गोद ली हुई दो वर्ष की बालिका शिशु को गैर-कानूनी तरीके से ले जाकर हिरासत में रखा है। उच्च न्यायालय की न्यायाधीश जस्टिस टी. माधवी देवी ने हाल ही में इस मामले पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि याचिकाकर्ता की पत्नी ने वर्ष 2014 में विवाह के बाद भी संतान न होने के कारण नलगोंडा ज़िलाधीश को अनाथ शिशु दत्तक लेने के लिए आवेदन किया।

उसका यह आवेदन कई वर्षों से लम्बित है। इस दौरान वर्ष 2023 में दत्ता हवन कर नक्का यादगिरी नाम के एक व्यक्ति से एक माह की कन्या शिशु को गोद लिया गया। वर्ष 2024 में गोद ली गई कन्या शिशु का बड़े पैमाने पर जन्मदिन मनाया गया। कुछ लोगों की शिकायत के आधार पर नक्का यादगिरी और दूसरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस मामले के तहत पिछले वर्ष 18 जनवरी को पुलिस याचिकाकर्ता के घर गई और दत्तक ली गई कन्या शिशु को उनके घर से हासिल कर उसे नलगोंडा के एक चिल्ड्रन होम को सौंप दिया।

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नक्का यादगिरी चाइल्ड ट्रैफिकिंग गिरोह में शामिल बताया गया

इसके बाद दत्तक लेने वाले दंपत्ति याचिकाकर्ता को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया। उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के बाद सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) में भी आवेदन किया गया। वहाँ पर भी पहले से ही कई लोग आवेदन कर इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दत्तक ली गई कन्या शिशु को सौंपने के लिए पुलिस और चाइल्ड वेल्फेयर अधिकारियों से आवेदन करने के बाद ही अदालत का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सरकारी अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि नक्का यादगिरी चाइल्ड ट्रैफिकिंग गिरोह में शामिल था। उसने पहले भी 6-6 लाख रुपये में बच्चों को बेचा था। उन्होंने कहा कि यादगिरी के खिलाफ पहले से ही मामले दर्ज हैं।

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता ने शिशु को उसके माता-पिता से गोद नहीं लिया, बल्कि नक्का यादगिरी नाम के व्यक्ति से उसे पैसों का भुगतान कर खरीदा है। न्यायाधीश ने कहा कि मामले की अभी जाँच जारी है और यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता का गोद लेना वैध नहीं है। देश में गोद लेने की गंभीर समस्या को देखते हुए केंद्र ने सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) का गठन किया। इसके तहत दत्तक लेने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए गए। दिशा-निर्देश के आधार पर ही दत्तक लिया जाना चाहिए।

मौजूदा मामले में हालाँकि याचिकाकर्ता दत्तक ली गई शिशु की अच्छी देखभाल कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने गोद लेने की ानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, इसीलिए इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है। याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि पुलिस और चाइल्ड वेल्फेयर डिपार्टमेंट को अदालत यह सिफारिश करने का निर्देश नहीं दे सकती कि बालिका शिशु को याचिकाकर्ता को सौंप दिया जाए। हालाँकि बालिका शिशु के साथ याचिकाकर्ता का लगाव हो गया।

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