लंबी तनातनी के बाद आखिर भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील

ट्रंप ने व्यापार समझौते की तो बात की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उनका संदर्भ एफटीए से है, जिसे दोनों देशों की ट्रेड टीमों ने फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की वाशिंगटन यात्रा के बाद तैयार किया था; क्योंकि भारत-अमेरिका के समझौते का अंतिम टेक्स्ट अभी जारी नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप ने अपनी पोस्ट में जो यह दावा किया है कि भारत टैरिफ को शून्य करेगा, वह किस सिलसिले में व किस चीज़ पर है। इसके अतिरिक्त भारत सोयाबीन व डेरी जैसे कृषि सेक्टर खोलने के लिए तैयार नहीं था, अब उनकी क्या स्थिति है, यह भी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल बस इतना स्पष्ट हो सका है कि ट्रंप ने 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जो पाकिस्तान (19 प्रतिशत) व बांग्लादेश (20 प्रतिशत) से भी कम है और रूसी तेल खरीदने पर जो अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया था, उसे हटा लिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फ़ोन पर वार्ता करने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर टैरिफ में कटौती करने की घोषणा की है, जो अब 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। यह भारत व अमेरिका के बीचे फिर से रिश्ते बेहतर होने का संकेत है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह कहते हुए इस घोषणा का स्वागत किया है कि मेड इन इंडिया उत्पादों को अब कम टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने इस फैसले के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का शुािढया अदा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि टैरिफ में यह कटौती प्रधानमंत्री के आग्रह पर की गई है और यह दोस्ती व सम्मान को प्रतिबिम्बित करती है।

ट्रंप का दावा: लंबित व्यापार समझौता हुआ पूरा

ट्रंप ने यह भी कहा कि काफी समय से लम्बित पड़ा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब मुकम्मल हो गया है, बावजूद इसके कि पहले कुछ असहमतियां थीं, विशेषकर कृषि को लेकर। इसके अतिरिक्त ट्रंप का यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी रूस से तेल खरीदारी बंद करने पर सहमत हो गये हैं और अपने आयात अमेरिका व वेनेज़ुएला की तरफ शिफ्ट करेंगे। जुर्माने के तौरपर जो अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था, उसे भी खत्म कर दिया गया है।

टैरिफ राहत व नीति स्पष्टता से उम्मीद है कि 2026 में निर्यात में सतत रिकवरी संभव हो सकेगी। इसलिए भारत के निर्यातक अब अमेरिकी खरीदारों से मांग में संभावित वृद्धि के लिए तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि वाशिंगटन व नई दिल्ली के बीच राजनीतिक व आर्थिक तनाव के कारण व्यापार समझौता 2025 के मध्य से लटका हुआ था और फिर अमेरिका ने 27 अगस्त 2025 से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ थोप दिया, जिसमें 25 प्रतिशत जुर्माने के तौरपर था, रूस से तेल खरीदने की वजह से। इस बेतुके 50 प्रतिशत टैरिफ से भारतीय निर्यातकों पर कुप्रभाव पड़ रहा था।

अब सब कुछ पहले जैसा होने की उम्मीद है। लेकिन व्यापार विशेषज्ञ सावधनी बरतने को कह रहे हैं; क्योंकि समझौता लागू करने के विस्तृत विवरण की अभी प्रतीक्षा है। उनका कहना है कि पिछला अनुभव बताता है कि विवाद बहुत जल्दी फिर से उभर सकता है। हालांकि समझौता प्रगति का संकेत है, लेकिन पुनः तनाव को रोकने के लिए निरंतर डायलॉग आवश्यक है।
नई दिल्ली व वाशिंगटन पिछले साल फरवरी से द्विपक्षीय व्यापार समझौत (बीटीए) करने का प्रयास कर रहे थे ताकि 2030 तक 500 बिलियन डॉलर का व्यापार हो सके, जो वर्तमान में 191 बिलियन डॉलर का है।

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापार पार्टनर है कि भारत जो कुल निर्यात करता है उसका लगभग 20 प्रतिशत अमेरिका जाता है और द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य 131.84 बिलियन डॉलर है। कुछ दिन पहले भारत ने यूरोपीय संघ से मुक्त व्यापार समझौता किया था। इस प्रकार भारत के अब संसार के दो बड़े व्यापार ब्लॉकों से समझौते हो गये हैं। ऐसा राष्ट्र के आर्थिक इतिहास में पहली बार हुआ है। ज़ाहिर है इस खबर से भारतीय स्टॉक्स में उछाल आने की उम्मीद है और रूपये के मूल्य में भी सुधार आ सकता है।

टेक्सटाइल, सी-फ़ूड आदि निर्यातकों ने तुरंत संतोष व्यक्त किया है और वह आशा कर रहे हैं कि अमेरिका को उनका निर्यात फिर से पहले जैसा हो जायेगा। यहां यह बताना आवश्यक है कि पिछले 12 माह में भारत ने पांच व्यापार समझौते किये हैं- अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूज़ीलैंड। ऐसा प्रतीत होता है कि भारत जो अपने लिए नये बाज़ार तलाश करने में कामयाब हो रहा था व चीन से भी रिश्ते सामान्य होने की संभावना बढ़ रही थी, उसके दबाव में अमेरिका ने व्यापर समझौते किया।

भारतीय समय के अनुसार सोमवार (2 फरवरी 2026) की रात को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, प्रधानमंत्री मोदी से दोस्ती व सम्मान और उनके आग्रह पर, तुरंत प्रभाव से हम यूएस व भारत के बीच व्यापार समझौते पर सहमत हो गये हैं, जिसके तहत यूएस कम रेसिप्रोकल टैरिफ चार्ज करेगा, 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत।… इसी तरह वह (भारत) भी यूएस के खिलाफ टैरिफ व ग़ैर-टैरिफ बाधाओं को कम करेंगे, शून्य तक।

तेल आयात शिफ्ट करने के बयान पर असमंजस बरकरार

ट्रंप की पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, अपने दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से आज बात करके अच्छा लगा। ख़ुशी है कि मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स पर अब 18 प्रतिशत का कम टैरिफ लगेगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 बिलियन लोगों की तरफ से राष्ट्रपति ट्रंप को बहुत-बहुत शुक्रिया। जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को फायदा होता है और लाभकारी आपसी सहयोग के लिए अपार अवसर खुल जाते हैं।

लेकिन भारत ने ट्रंप के इस दावे का कोई जिक्र नहीं किया कि प्रधानमंत्री ने रूसी तेल आयात न करने और अमेरिकी तेल खरीदने का वायदा किया है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा था, हमने बहुत सारी चीज़ों पर बातें कीं, जिनमें व्यापार और रूस व यूक्रेन का युद्ध समाप्त करना भी शामिल था। वह (मोदी) रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हैं और यूएस व संभवत वेनेज़ुएला से अधिक तेल खरीदेंगे।

बहरहाल, व्यापार समझौता होने के बाद अमेरिका की सांसद सिडनी डोव ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन को द्विपक्षीय संबंध तेज़ी से मज़बूत करने चाहिए। उन्होंने पिछले 50 प्रतिशत टैरिफ की आलोचना करते हुए कहा कि इसकी वजह से दोनों देशों के बीच अर्थपूर्ण सहयोग बाधित हो रहा था, जिसमें पिछले साल होने वाला क्वैड लीडर्स समिट भी शामिल है। हालांकि भारत की तरफ से अभी इस व्यापार समझौते का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका की एग्रीकल्चर पोटरी ब्रुक रोल्लिंस ने कहा है कि अमेरिका भारत को अधिक कृषि उत्पाद निर्यात करेगा, जिससे ग्रामीण अमेरिका में ज्यादा कैश आ सकेगा।

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समझौते से उत्साह, लेकिन अहम शर्तें अब भी अधूरी

उनके अनुसार 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 बिलियन डॉलर था, जो इस समझौते से काफी कम हो जायेगा। वह इसे अमेरिका की पहली जीत बता रही हैं। यह सही है कि एक साल के गंभीर तनाव के बाद भारत व अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने की घोषणा से दोनों देशों में उत्साह है और निर्यातकों ने राहत की सांस ली है, लेकिन विस्तृत एफटीए, भारतीय निवेश के वायदे, रूसी तेल, चाबहार पोर्ट आदि से संबंधित प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं।

ट्रंप ने व्यापार समझौते की तो बात की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उनका संदर्भ एफटीए से है, जिसे दोनों देशों की ट्रेड टीमों ने फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की वाशिंगटन यात्रा के बाद तैयार किया था; क्योंकि भारत-अमेरिका के समझौते का अंतिम टेक्स्ट अभी जारी नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप ने अपनी पोस्ट में जो यह दावा किया है कि भारत टैरिफ को शून्य करेगा, वह किस सिलसिले में व किस चीज़ पर है।

शाहिद ए चौधरी
शाहिद ए चौधरी

इसके अतिरिक्त भारत सोयाबीन व डेरी जैसे कृषि सेक्टर खोलने के लिए तैयार नहीं था, अब उनकी क्या स्थिति है, यह भी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल बस इतना स्पष्ट हो सका है कि ट्रंप ने 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जो पाकिस्तान (19 प्रतिशत) व बांग्लादेश (20 प्रतिशत) से भी कम है और रूसी तेल खरीदने पर जो अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया था, उसे हटा लिया गया है। समझौते की विस्तृत जानकारी तो जल्द सामने आ जायेगी, लेकिन यह स्वागतयोग्य कदम है कि भारत व अमेरिका के संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं और वह मिलकर साथ काम करने को तैयार हैं।

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