₹50 तक सस्ते हो सकते हैं एआई वित्तीय समाधान- बीसीजी रिपोर्ट

मुंबई, ग्लोबल फिनटेक फेस्ट दौरान एआई द्वारा संचालित एक बेहतर दुनिया के लिए वित्त को सशक्त बनाने के विषय पर बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) ने अपनी प्रमुख रिपोर्ट अभिसरण: वित्त के अगले युग के लिए मानव + एआई’ जारी की। रिपोर्ट में दावा किया गया है है कि एआई-संचालित वित्तीय सेवाएं ₹150–250 प्रति माह की लागत पर व्यवहार्य हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर उपयोग व घटती इंफरेंस लागत के चलते अगले 3–4 वर्षों में यह कीमत ₹50 तक आ सकती है।

बीसीजी ने बताया कि दुनिया इस समय एक “एआई सुपर-साइकिल” से गुजर रही है। पिछले पांच वर्षों में $1.3 ट्रिलियन का निवेश एआई में हुआ है जो वैश्विक फिनटेक निवेश से चार गुना अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरेटिव एआई टूल्स ने केवल दो वर्षों में कामकाजी आबादी के बीच 40% अपनापन (penetration) हासिल किया है, जबकि इंटरनेट को इस स्तर तक पहुंचने में पांच वर्ष लगे थे।

बीसीजी के ग्लोबल हेड ऑफ फिनटेक और इंडिया हेड ऑफ फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस यशराज एरांडे ने कहा, “भारत एक निर्णायक दौर में है। एक ओर भारतीय फिनटेक्स ने पिछले दो वर्षों में 35% की वृद्धि दर्ज की है और 2030 तक $190 अरब के स्तर तक पहुंचने की राह पर हैं। दूसरी ओर, एआई वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नियम बदल रहा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा एआई उपभोक्ता बाजार, वैश्विक उपयोग-केंद्र और तकनीकी समाधान निर्यातक बनने की दिशा में अग्रसर है। सरकार का IndiaAI Mission इस दिशा में मजबूत कदम है।”

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एआई का प्रभाव केवल बड़ी संस्थाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह हर व्यक्ति और छोटे व्यवसायों तक पहुंचेगा। JanArth.AI और VyaparSaathi.AI जैसे प्रस्तावित एप्लिकेशन घरों के लिए व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन और सूक्ष्म व लघु उद्यमों के लिए वर्चुअल CFO की भूमिका निभा सकते हैं।

रिपोर्ट में भारत को एआई की क्षमता को पूरी तरह उपयोग करने के लिए छह अहम स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत बताई गई है

इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत वैश्विक डेटा का 20% उत्पन्न करता है, लेकिन डेटा सेंटर क्षमता में उसकी हिस्सेदारी केवल 2% है। 2030 तक इसे 8% (लगभग 17 GW) तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। कंप्यूट: वैश्विक साझेदारियों को सशक्त करते हुए स्वदेशी GPU डिज़ाइन में निवेश। डेटा: AIKosh प्लेटफॉर्म का विस्तार कर नैतिक व समृद्ध डेटा कॉमन्स तैयार करना। मॉडल्स: भारत और ग्लोबल साउथ के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में डोमेन-विशिष्ट मॉडल तैयार करना। कैपिटल: एआई नवाचार के लिए ₹10 लाख करोड़ से अधिक निवेश को बढ़ावा देना और दीर्घकालिक पूंजी को प्रोत्साहित करना। टैलेंट: भारत को Global AI Brain में रूपांतरित करने के लिए अनुसंधान, प्रतिभा संरक्षण और कौशल विकास को सशक्त बनाना।

एआई सॉफ्टवेयर और सेवाओं के बाजार का बड़ा हिस्सा

बीसीजी का अनुमान है कि भारत 2028 तक वैश्विक एआई सॉफ्टवेयर और सेवाओं के बाजार का बड़ा हिस्सा हासिल कर सकता है, जिसकी अनुमानित राजस्व क्षमता $100–120 अरब होगी जो वर्तमान में भारत के आईटी सेवा बाजार का लगभग 50% है। वर्तमान में विश्वभर में केवल 27% कंपनियां ही एआई से वास्तविक मूल्य प्राप्त कर पा रही हैं। भारत के लिए आवश्यक है कि वह UPI-शैली के ओपन इनोवेशन मॉडल को अपनाकर एआई के फायदों को बड़े पैमाने पर साकार करे।

    एआई ने नवाचार को फिर से कॉर्पोरेट एजेंडा के केंद्र में ला दिया है 10 में से 9 CXO नेता इसे प्राथमिकता दे रहे हैं और हर चार में से एक अगले दो वर्षों में अपने एआई बजट को 60% तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट ने अंत में यह जोर देकर कहा कि जिम्मेदार और समावेशी एआई अपनाना बेहद जरूरी है, ताकि वित्तीय प्रणालियों में न्याय, पारदर्शिता और विश्वास सुनिश्चित किया जा सके और एआई के लाभ स्थायी रूप से प्राप्त किए जा सकें।

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