एआईजी हॉस्पिटल्स ने मनाया विश्व फैटी लिवर दिवस
हैदराबाद, एआईजी हॉस्पिटल्स ने विश्व फैटी लिवर दिवस पर फैटी लिवर से मिलकर लड़ने की पहल करते हुए विशेषज्ञों और आम लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया। विशेषज्ञों ने फैटी लिवर के वैश्विक स्वास्थ्य संकट के रूप में इसके शीघ्र पता लगाने और जीवनशैली में बदलाव लाकर इसे रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, फैटी लिवर रोग अब दुनिया भर में सबसे व्यापक लिवर रोगों में से एक है। यह लगभग चार वयस्कों में से एक को प्रभावित करता है। एआईजी हॉस्पिटल्स ने विश्व फैटी लिवर दिवस को शक्तिशाली जागरूकता वार्ता के साथ मनाया।

इसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम लोगों को एक साथ लाया गया। कार्यक्रम में रोगियों, चिकित्सकों और आम लोगों की व्यक्तिगत और ऑनलाइन भागीदारी रही। गतिहीन जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर आहार, मोटापे और मधुमेह की बढ़ती दरों से प्रेरित गैरअल्कोहल फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) चुपचाप सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गया है। जागरूकता वार्ता का उद्देश्य इस अंतर को पाटना था, जिसमें नियमित जाँच, प्रारंभिक निदान और साक्ष्य आधारित जीवनशैली संशोधनों के महत्व पर जोर दिया गया।
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फैटी लिवर रोकथाम में जागरूकता और शिक्षा अहम
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एआईजी हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. डी. नागेश्वर रेड्डी ने बताया कि उपचार से रोकथाम की ओर मोड़ने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि फैटी लिवर एक महामारी से स्थानिक बीमारी बन गई है। यह कार्डियोमेटाबोलिक बीमारियों का पेंद्र है। दिल के दौरे से लेकर मधुमेह तक और अब हम लिवर कैंसर से भी इसके खतरनाक संबंध देख रहे हैं। असली समाधान जागरूकता से शुरू होता है।
शिक्षा, खासकर कम उम्र से, निदान से ज़्यादा शक्तिशाली है। हमें स्कूलों, घरों और समुदायों में लिवर के स्वास्थ्य के बारे में बात करना शुरू करना होगा। विशेषज्ञों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जीवनशैली में बदलाव जैसे कि स्वस्थ खाने की आदतें, नियमित व्यायाम और वजन प्रबंधन फैटी लिवर रोग को रोकने और नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। एआईजी हॉस्पिटल्स, क्रिटिकल केयर हेपेटोलॉजी के निदेशक डॉ. आनंद कुलकर्णी ने कहा कि फैटी लीवर अक्सर तब तक पता नहीं चलता, जब तक कि यह बहुत गंभीर न हो जाए।
फैटी लिवर: शरीर की आंतरिक चेतावनी का संकेत
जब अल्ट्रासाउंड पर फैटी लीवर दिखाई देता है, तो लीवर का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही वसा से भरा होता है। यह एक चेतावनी है। पैनल ने बताया कि कैसे अत्यधिक प्रसंस्वफढत खाद्य पदार्थों का सेवन, लंबे समय तक बैठे रहना और व्यायाम की कमी जैसे कारकों ने इस स्थिति को तेजी से आम बना दिया। बातचीत में इस बात पर जोर दिया गया कि फैटी लीवर कोई अलग समस्या नहीं है, बल्कि यह गहरी चयापचय संबंधी शिथिलता का संकेत है।
एआईजी हॉस्पिटल्स, कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अनुज कपाड़िया ने इस लिंक को स्पष्ट किया कि लीवर में वसा एक चेतावनी संकेत है। यह दर्शाता है कि आपके शरीर के अंदर क्या हो रहा है। अगर लीवर में वसा है, तो आपकी धमनियों में भी वसा जमा हो सकती है। एआईजी हॉस्पिटल्स के हेपेटोलॉजी के प्रमुख डॉ. पी.एन. राव ने विकसित दृष्टिकोण पर अंतर्दृष्टि साझा की।
एआईजी हॉस्पिटल्स के सेंटर ऑफ ओबेसिटी के एंडोस्कोपी निदेशक डॉ. राकेश ने एआई संचालित क्रीनिंग टूल विकसित करने में आईएसबी के साथ एआईजी के सहयोगात्मक कार्य का विवरण दिया। कार्यक्रम का समापन एक मज़बूत संदेश के साथ हुआ। इसमें बताया गया कि फैटी लिवर की बीमारी को रोका जा सकता है। कई मामलों में अगर समय रहते कार्रवाई की जाए, तो इसे ठीक भी किया जा सकता है।
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