हैदराबाद को 2034 तक नेट ज़ीरो शहर बनाने का लक्ष्य : रेवंत रेड्डी
हैदराबाद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि वर्तमान स्थिति को पर्यावरणीय आपातकाल कहा जा सकता है। ऐसे में हरित ऊर्जा पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने आर्थिक विकास को पर्यावरण की स्थिरता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार ने हैदराबाद को 2034 तक नेट ज़ीरो शहर बनाने का लक्ष्य रखा है और शीघ्र ही शहर-स्तरीय कार्बन फुटप्रिंट ऑडिट किया जाएगा। अगले पाँच वर्षों में शहरी क्षेत्र के भीतर उद्योगों की संख्या लगभग नगण्य करने का भी लक्ष्य है।



मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि विकास, निवेश और रोज़गार सृजन को स्थिर गति के साथ आगे बढ़ाना ज़रूरी है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी मुंबई क्लाइमेट वीक कार्यक्रम में विशेष वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने तेलंगाना के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए आर्थिक विकास को पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि 2047 को समझने के लिए 1947 से शुरुआत करना आवश्यक है।
भारत में शिक्षा और सिंचाई पर विकास की नींव
1950 से 1990 के बीच भारत की प्राथमिकताएँ शिक्षा और सिंचाई रहीं, जिसके दौरान गाँव के स्कूलों से लेकर आईआईटी, आईआईएससी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना हुई तथा बड़े बांधों का निर्माण किया गया। इसके परिणामस्वरूप 1990 तक भारत खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल करने, जीवन प्रत्याशा बढ़ाने और इंजीनियरों, डॉक्टरों तथा वैज्ञानिकों के लिए वैश्विक पहचान बनाने में सफल रहा।
1991 से 2020 के सुधार काल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस दौर में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी) पर ध्यान केंद्रित हुआ। दूरसंचार और सॉफ्टवेयर क्रांति के कारण भारत सेवा क्षेत्र की महाशक्ति के रूप में उभरा। वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों ने देश में अपने केंद्र स्थापित किए और भारत में सबसे अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर विकसित हुए। हालांकि इस अवधि में विनिर्माण क्षेत्र के अवसर काफी हद तक चूक गए और विशेष रूप से कोविड के बाद विकास की सोच और प्राथमिकताओं में बदलाव आया है।
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ऊर्जा खपत से तय होगी अर्थव्यवस्था की रफ्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी अर्थव्यवस्था की वास्तविक मुद्रा ऊर्जा या बिजली होती है और विकास का आकलन बिजली उत्पादन एवं खपत से किया जाता है। तेलंगाना वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 16,610 मेगावाट बिजली की खपत कर रहा है। पिछले वर्ष अधिकतम मांग 17,162 मेगावाट दर्ज की गई, जो इस वर्ष 19,000 मेगावाट से अधिक होने और 2034 तक 34,000 मेगावाट से आगे जाने का अनुमान है, क्योंकि राज्य एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।
राज्य की कुल ऊर्जा का लगभग 24.8 से 25 प्रतिशत हिस्सा हरित ऊर्जा से प्राप्त हो रहा है। उन्होंने तेलंगाना के 200 बिलियन डॉलर की राज्य जीडीपी से 2034 तक एक ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा दोहराई। भविष्य के विकास के प्रमुख स्तंभों के रूप में उन्होंने अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, शिक्षा एवं कौशल, ऊर्जा, रोजगार, उद्यमिता और सभी के लिए संपत्ति सृजन के अवसरों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने राज्य के रणनीतिक ढांचे को तीन क्षेत्रों क्योर, प्योर और रेयर में विभाजित बताते हुए कहा कि 160 किलोमीटर के आउटर रिंग रोड के भीतर हैदराबाद को कोर अर्बन रीजन इकोनॉमी घोषित किया गया है। आउटर रिंग रोड और 360 किलोमीटर के रीजनल रिंग रोड के बीच स्थित प्योर ज़ोन को विनिर्माण के लिए समर्पित किया गया है, जिसे हरित ऊर्जा आधारित चाइना प्लस 1 विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है।
रेवंत रेड्डी ने जलवायु आपातकाल पर जताई चिंता
कोविड और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभाव का उल्लेख करते हुए रेवंत ने वर्तमान स्थिति को जलवायु आपातकाल के रूप में परिभाषित करते कहा कि विकास, निवेश और रोजगार सृजन को स्थिरता के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। हैदराबाद के संदर्भ में उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर हटाए जाने से ईवी अपनाने में तेजी आई है और ईवी कंपनियों के साथ विनिर्माण निवेश पर चर्चा जारी है।
2 लाख से अधिक ऑटो-रिक्शा को हरित विकल्पों की ओर परिवर्तित किया जा रहा है। 3,500 से अधिक आरटीसी बसों को इलेक्ट्रिक बसों से बदला जा रहा है तथा हैदराबाद मेट्रो का विस्तार 71 किलोमीटर से बढ़ाकर 200 किलोमीटर से अधिक किया जा रहा है। साथ ही उद्योगों को क्रमिक रूप से कोर शहरी क्षेत्र से बाहरी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित किया जा रहा है। उन्होंने स्थिरता से जुड़ी प्रमुख पहलों में मूसी नदी के पुनरुद्धार, झीलों के संरक्षण, जल एवं ऊर्जा ग्रिड को सुदृढ़ करने तथा भारत की पहली समर्पित पर्यावरण पुलिस बल हैद्रा की स्थापना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा की प्रत्येक इकाई राज्य, देश और पूरे ग्रह के लिए लाभकारी है। उन्होंने हरित ऊर्जा से संचालित विनिर्माण क्रांति की आवश्यकता पर बल दिया।
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