दभाहिप्र सभा के शिक्षा महाविद्यालय का वार्षिकोत्सव संपन्न

हैदराबाद, खैरताबाद स्थित दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के पापन्ना गुप्त सभागार में शिक्षा महाविद्यालय का वार्षिकोत्सव उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सी.एन. मुगुटकर ने की।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्य अतिथि के रूप में घनश्यामदास जाजू (प्रबंध निधिपालक, मारवाड़ी हिन्दी विद्यालय, पैराडाइस, सिकंदराबाद), प्रमुख वक्ता के रूप में शेख मोहम्मद कासिम (कोषाध्यक्ष, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा-आन्ध्र एवं तेलंगाना), विशेष अतिथि के रूप में चवाकुला रामकृष्ण राव (प्रबंध निधिपालक, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा-आन्ध्र एवं तेलंगाना), ए. जानकी (सचिव (प्रभारी) एवं सम्पर्क अधिकारी, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा-आन्ध्र एवं तेलंगाना तथा महाविद्यालय के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. शेख जुबेर अहमद मंचासीन थे।

कार्यक्रम का आरंभ छात्राध्यापिकाओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से हुआ। तत्पश्चात मंचासीन मान्यवरों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया। अतिथियों का परिचय डॉ. वाई. ललिता ने दिया। महाविद्यालय की ओर से अतिथियों का पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। छात्राध्यापिका कीर्तिपर्णा जेना, सष्मिता गहिर तथा छात्राध्यापक दिलीप कुमार बुधिया ने महाविद्यालय और शिक्षकों के प्रति भावनाएँ व्यक्त कीं।

वार्षिक प्रतिवेदन का वाचन डॉ. शेख जुबेर अहमद ने किया। घनश्यामदास जाजू ने छात्राध्यापकों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। मारवाड़ी हिन्दी विद्यालय की प्रधानाचार्या एकता जायसवाल ने विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। चवाकुला रामकृष्ण राव ने विद्यार्थियों को अनुशासित जीवन जीने की सीख दी। ए. जानकी ने कहा कि अब विद्यार्थी जीवन समाप्त कर आप एक शिक्षक के रूप में प्रवेश करने जा रहे हैं।

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शिक्षक का दायित्व: ज्ञान से समाज निर्माण

मुगुटकर ने ईमानदारी से कर्तव्य निभाने और आने वाली परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएँ दीं। शेख मोहम्मद कासिम ने कहा कि अब तक अर्जित किताबी ज्ञान को जीवन में उतारने का समय आ गया है। समाज में रहते हुए नियमों और कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अपने ज्ञान को विद्यार्थियों तक पहुँचाकर उन्हें सजग नागरिक बनाना प्रत्येक शिक्षक का कर्तव्य है।

डॉ. सी.एन. मुगुटकर ने कहा कि निरंतर प्रयास ही सफलता की कुँजी है। जब आप सफलता प्राप्त करेंगे, तो समाज के प्रति दायित्व निभाना आपकी नैतिक जिम्मेदारी होगी। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुख्यधारा में लाना और उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित करना शिक्षक का कर्तव्य है।

अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक पी. अरुणा देवी, डॉ. डी.डी. देसाई, जी. एकांबरेश्वरुडु, नृपतुंगा सी.के., के. गोपीनाथ, उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान के असिस्टेंट प्रो. डॉ. शक्ति कुमार द्विवेदी, ग्रंथपाल डॉ. संतोष कांबले, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के व्यवस्थापक डी. किशोर बाबू, डी. सुनील बाबू, एम. राधाकृष्ण, सभा के कर्मचारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे। पी. अरुणा देवी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वाई. ललिता कुमारी ने किया।

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