मुकर्रम जाह के जीवन पर अनुराधा नाइक की पुस्तक लोकार्पित
हैदराबाद, हैदराबाद के आठवें निज़ाम मीर बरकत अली ख़ान मुकर्रम जाह के जीवन और समय के दस्तावेज़ के रूप में आर्किटेक्ट अनुराधा एस. नाइक द्वारा लिखित पुस्तक ‘एच.ई.एच. मीर बरकत अली ख़ान मुकर्रम जाह बहादुर: द लाइफ़ ऐंड टाइम्स ऑफ़ द एट्थ निज़ाम ऑफ़ हैदराबाद’ चौमहल्ला पैलेस में आयोजित एक कार्यक्रम में लोकार्पित की गयी।
मीर बरकत अली खान मुकर्रम जाह के जीवन पर वास्तुकार एवं लेखिका अनुराधा एस. नाइक की पुस्तक चौमहल्ला पैलेस ट्रस्ट ने प्रकाशित की है। इसमें 250 से अधिक दुर्लभ तस्वीरों के साथ-साथ ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और व्यक्तिगत स्मृति-चिह्नों की जानकारी साझा की गयी है। इनमें से कई तस्वीरें चौमहल्ला पैलेस संग्रह और मुकर्रम जाह के तत्काल परिवार के निजी संग्रह से ली गई हैं। अधिकांश पारिवारिक तस्वीरें प्रिंस अज़मत जाह के संग्रह से ली गई हैं। मुकर्रम जाह की विरासत को समर्पित इस पुस्तक का विमोचन आसफ़जाही परिवार के वर्तमान प्रमुख नवाब अज़मत जाह ने किया।
लोकार्पण समारोह में इतिहास और विरासत पर हुई चर्चा
लोकार्पण कार्यक्रम में बताया गया कि मुकर्रम जाह का जन्म 6 अक्तूबर, 1933 को फ्रांस के नीस शहर में हुआ था। वे प्रिंस ऑफ़ बेरार आज़म जाह और प्रिंसेस दुर्रु शहवार के पुत्र थे। दुर्रु शहवार अंतिम ऑटोमन ख़लीफ़ा अब्दुल मजीद द्वितीय की पुत्री थीं। मुकर्रम जाह को उन्हें उनके दादा मीर उस्मान अली ख़ान ने उत्तराधिकारी के रूप में चुना था और 6 अप्रैल, 1967 को उनका हैदराबाद के निज़ाम के रूप में राज्याभिषेक हुआ था। अपने सार्वजनिक जीवन के दौरान मुकर्रम जाह ने भारतीय संवैधानिक परिवर्तनों के अनुरूप स्वयं को ढाला। वे जवाहरलाल नेहरू का अत्यंत सम्मान करते थे और उनसे परामर्श भी लेते थे। 1962 में भारत–चीन युद्ध के दौरान उन्होंने देश की सेवा की इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा मानद लेफ्टिनेंट तथा बाद में मानद कर्नल नियुक्त किया गया।

लेखिका अनुराधा नाइक ने ऐतिहासिक और व्यक्तिगत पहलुओं को उकेरा
संस्थागत भूमिकाओं में मुकर्रम जाह ने उस्मानिया विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने कई परोपकारी संस्थाओं की स्थापना की, जिनमें पुरानी हवेली स्थित मुकर्रम जाह ट्रस्ट, मुकर्रम जाह विलेज डेवलपमेंट सोसाइटी, और चौमहल्ला पैलेस ट्रस्ट शामिल हैं।
लेखिका अनुराधा नाइक ने एडिनबर्ग कॉलेज ऑफ़ आर्ट, यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबर्ग और द बार्टलेट, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से शिक्षा प्राप्त की है तथा यू.के. में कई परियोजनाओं पर कार्य किया है। 2010 में हैदराबाद लौटने के बाद से वे चौमहल्ला पैलेस से जुड़ी हुई हैं और वहाँ पुनर्स्थापन, गैलरी डिज़ाइन एवं संरक्षण का कार्य कर रही हैं। उन्होंने ताज फ़लकनुमा पैलेस निज़ाम के अन्य महलों पर कार्य किया है। तथा पुरानी हवेली स्थित सिटी म्यूज़ियम ऑफ़ हैदराबाद के संरक्षण में भी योगदान किया है। इससे पूर्व उन्होंने राष्ट्रपति भवन द्वारा प्रकाशित पुस्तक में भी योगदान किया था। आज के लोकार्पण समारोह में मुकर्रम जाह ट्रस्ट के न्यासी नवाब एम. ए. फ़ैज़ ख़ान भी उपस्थित थे।
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