अनुकम्पा नियुक्ति के एक वर्ष के भीतर आवेदन करना अनिवार्य : कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि यदि किसी कार्यरत पिता की मृत्यु हो जाती है और उसकी पत्नी सरकारी नौकरी में है, तो परिवार के मुखिया की मृत्यु के समय परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी होने पर परिवार का कोई भी सदस्य अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मृतक कर्मचारी का परिवार आर्थिक संकट में है, तो अधिकारी अनुकम्पा नियुक्ति की अनुमति तभी दे सकते हैं, जब परिवार के सदस्य एक वर्ष के भीतर अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन करें। यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कर्मचारी की मृत्यु के चार वर्ष बाद परिवार का कोई सदस्य अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन करता है, तो अधिकारियों द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति की अनुमति न देना कानूनी है, भले ही परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो और रोजगार न हो।
चार साल बाद अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं होगा
कर्मचारी की मृत्यु के समय अधिकारियों ने अनुकम्पा नियुक्ति देने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसकी पत्नी सरकारी नौकरी में थी। उच्च न्यायालय ने चार वर्ष बाद बच्चों को अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन करने की अनुमति न देने के सरकारी फैसले को बरकरार रखा है, क्योंकि माँ ने पुनर्विवाह कर लिया था।
वरंगल के एमजीएम अस्पताल में एमएनएम के रूप में कार्यरत टी. जीवना श्री नामक युवती ने अपने पिता के निधन के बाद वर्ष 2018 में अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। उन्होंने अपने आवेदन को खारिज किए जाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी. एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने हाल ही में एकल न्यायाधीश द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद दायर अपील की सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान खण्डपीठ ने याद दिलाया कि जब उन्होंने वर्ष 2018 में अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, तो सरकार ने आवेदन खारिज कर दिया था, क्योंकि उनकी माँ सरकारी कर्मचारी थी। हालाँकि खण्डपीठ ने फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता की माँ के वर्ष 2021 में दूसरी शादी करने के चार साल बाद उत्तराधिकारी के रूप में अधिकारियों को अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
एकल न्यायाधीश के इस फैसले को बरकरार रखा कि सिविल न्यायालय से उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त सम्पत्ति और पेंशन के लाभ की हकदार थी, न कि अनुकम्पा नियुक्ति के लिए, इस फैसले के साथ खण्डपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।
यह भी पढ़े– 25 को धर्म ध्वजा फहराएँगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



