जनांदोलनों को कुचलने का प्रयास : मेधा

हैदराबाद, जन आंदोलनों के राष्ट्रीय गठबंधन (एनएपीएम) के अधिवेशन में आज विभिन्न नेताओं ने इस बात पर चिंता जतायी की सरकारें जन आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही हैं। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि आंदोलनों को तेज़ किया जाए, ताकि सरकारें जनता के अधिकार को मानने के लिए मजबूर हों।

एनएपीएम के 30वें अखिल भारतीय अधिवेशन के दौरान आज प्रदर्शनी मैदान में प्रख्यात आंदोलनकर्मी व सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन, सीपीआई नेता अन्ने राजा, एमएलसी प्रो. कोदंडराम, समाजवादी सांसद जावेद अली सहित विभिन्न वक्ताओं ने विचार रखे। कार्यक्रम में संगठन से जुड़े जमीनी स्तर के कार्यकर्ता, नेता, संगठनों के प्रतिनिधि और जन अधिकारों के पैरोकार ने भाग लिया।

पाटकर के साथ पुलिस का व्यवहार अनुचित : मीनाक्षी नटराजन

मेधा पाटकर ने कहा कि सरकारें जनहित में बनाए गये कानूनों पर अमल नहीं कर रही हैं। सरकार चाहे किसी पार्टी की हो, जनअधिकारियों के लिए बनाये गये कानून पर अमल करना ज़रूरी है। विशेषकर उन्होंने किसानों और मज़दूरों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पार्टियों के मैनिफस्टो में तस्वीरों की भरमार है, लेकिन किसानों के लिए उनके पास कुछ भी नहीं है।

अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य के बारे में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जनाधिकारियों के लिए कई आंदोलन किये गए। इन आंदोलनों का जारी रहना जरूरी है। तभी आंदोलनों को सफलता मिल सकती है। एआईसीसी की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन ने कार्यक्रम में मेधा पाटकर के साथ चादरघाट में पुलिस के व्यवहार के मुद्दे पर खुलकर चर्चा की।

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आंदोलन की निरंतरता और सरकार की जवाबदेही ज़रूरी

उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस कार्यक्रम में कांग्रेसी नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक जन अधिकार आंदोलन कर्मी के रूप में भाग ले रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह मूसी के पास कार्यकर्ता के घर जाने से रोकना ग़लत है। विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है और इसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहाँ तक तेलंगाना सरकार की छह गारंटियों का प्रश्न है, वह इस संबंध में मिले ज्ञापन पत्र को सरकार के समक्ष रखने का प्रयास करेंगी।

प्रो. कोदंड राम ने कहा कि राजनीति रुपये-पैसे का खेल है। ऐसे में आंदोलन करना काफी कठिन है, लेकिन आंदोलन को छोड़ा नहीं जा सकता। इसे निरंतर जारी रखना ज़रूरी है। समाजवादी सांसद जावेद अली ने कहा कि राजनीतिक पार्टियाँ विपक्ष में रहकर जो आंदोलन करती हैं, सत्ता में आने के बाद उस मुद्दे पर डटे रहना काफी कठिन होता है। इसलिए आंदोलनकारियों को आंदोलन को तेज़ करने की ज़रूरत है, ताकि सरकारें उनके समाधान के लिए मजबूर हों।

सीपीआई नेता आन्ने राजा ने कहा कि भाजपा आरएसस आंदोलनकारियों को कुचलने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए उनके खिलाफ लड़ाई जारी रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियाँ महिलाओं को लक्षित कर वादे कर रही हैं और चुनाव भी उसी पहलू से लड़े जा रहे हैं, लेकिन सरकार बनने के बाद महिलाओं की नौकरियों और उनकी शिक्षा के लिए उनके पास कोई एजेंडा नहीं है।

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