होलिका-दहन एवं चंद्र-ग्रहण का मुहूर्त

होली का त्योहार नजदीक है, लेकिन इस बार होलिका-दहन को लेकर सनातनी कशमकश की स्थिति में हैं कि यह परंपरा किस तारीख को निभानी है- 2 मार्च या 3 मार्च? भद्रा और चंद्र ग्रहण के कारण यह स्थिति बनी है। यहाँ आचार्य अरविंद गौड़ सविस्तार से इसकी जानकारी दे रहे हैं।

होलिका-दहन

यदा तु पूर्व राजौ प्रदोष व्याप्त्य भावस्तत्सत्वे वा भद्रा रहित कालो।
न लभ्यते उत्तर दिने च प्रदोषे पूर्णिमा भावस्तदा पुच्छे कार्यम्।
पृथित्यां यानि कार्याणि शुभानि ह्यशुभानि च।
तानि सर्वाणि सिद्धयन्ति विष्टि पुच्छे न संशय।।
किन्तु : यदा विष्टि पुच्छं मध्य रात्रोत्तरं तदा प्रदोष एवं
दीपनम्-मध्यरात्रि मपाम्य विष्टि पुच्छं यदा भवेत्।
प्रदोषे ज्वालयेद्वघ्नि सुख सौभाग्य दायिनम्
प्रदोषान्मध्यरात्र्यन्तं होलिका पूजनं शुभम्।। (निर्णयसिंधु)

समय

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के उपरान्त सायं काल पूर्णिमा तिथि को 2 मार्च, सोमवार को प्रदोषकाल में 6 बजकर 24 मिनट से 8 बजकर 54 मिनट पर होलिका-दहन करना चाहिए।

चन्द्र ग्रहण की समय स्थिति

फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च, मंगलवार को चन्द्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरु हो रहा है। ग्रहण का स्पर्श काल दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगा। इसी प्रकार सम्मिलन काल शाम 4 बजकर 35 मिनट पर, मध्य काल शाम 5 बजकर 4 मिनट पर, उन्मीलन काल शाम 5 बजकर 33 मिनट पर, मोक्ष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। विरल छाया से निर्गम शाम 7 बजकर 53 मिनट पर होगा।

हैदराबाद में चन्द्र उदय का समय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। इस प्रकार चन्द्र ग्रहण का कुल समय लगभग 25 मिनट होगा।

राशियों पर शुभाशुभ प्रभाव

मेष : चिन्ता, विकार युक्त।
वृषभ : अपवाद, खेदजनक।
मिथुन : सुयोग, सौख्य, लाभदायक।
कर्क : अपवाद, व्यर्थ खर्च का परिचायक।
सिंह : शरीर विकार, कष्टप्रदायक।
कन्या : आर्थिक चिन्तन, अपव्यय सूचक।
तुला : सुखद, लाभ, सुयोग।
वृश्चिक : सुख, सुविधा, शुभ फल।
धनु : मानद रूप से कमी, चिन्तन सूचक।
मकर : देह विकार, पीड़ा प्रदायक।
कुम्भ : चिन्तन, विकार, अपवाद सूचक।
मीन : सुख, फलयोग।

यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि-मंडल पर मान्य है। अत: इन राशि व नक्षत्र वालों को ग्रहण-दर्शन नहीं करना चाहिए, अपितु अपने इष्टदेव की आराधना, गुरुमंत्र जप, धार्मिक ग्रंथों का पठन एवं मनन करना चाहिए।

(चन्द्रस्य ग्रस्तोदये तू याम चतुष्टय वेधात्पुर्व दिवा न भूंजीत्।। धर्म सिंधु)
इस वर्ष धुलेंडी 4 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी।

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