बाबा महाकाल का होता है ग्यारह कलशों से अभिषेक
मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्रीमहाकालेश्वर मंदिर में गर्मी के मौसम को देखते हुए बाबा महाकाल को शीतलता प्रदान करने की प्राचीन परंपरा की शुरुआत हो चुकी है। इसके तहत मंदिर में शिवलिंग के ऊपर 11 कलश बांधे गए। मिट्टी से निर्मित ये कलश देश की 11 पवित्र नदियों के नाम पर स्थापित किए जाते हैं।
इन कलशों से गिरने वाली जलधाराओं के माध्यम से आगामी तीन महीनों तक बाबा महाकाल का नियमित जलाभिषेक किया जाएगा। मान्यता है कि इससे उन्हें गर्मी से राहत मिलती है। यह परंपरा हर वर्ष गर्मी में निभाई जाती है।
प्राचीन मान्यता है कि जैसे आम इंसान को गर्मी का असर होता है, वैसे ही भगवान को भी ग्रीष्म त्रतु में शीतलता की आवश्यकता होती है। इसी मान्यता के तहत शिवलिंग पर 11 कलश (गलंतियां) बांधे जाते हैं। इन कलशों से लगातार जल की बूंदें शिवलिंग पर गिरती रहती हैं।
महाकाल पर निरंतर जलधारा से भक्तों की आस्था और शांति
वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से लेकर ज्येष्ठ पूर्णिमा तक इन कलशों से बाबा महाकाल पर लगातार जलधारा बहती रहेगी। भगवान के मस्तक पर रखी गई 11 मटकियों से रक्षा-सूत्र के माध्यम से जल की बूंदें गिरती हैं, जो शिवलिंग को शीतलता प्रदान करती हैं। इस जलाभिषेक से न केवल भगवान को गर्मी से राहत मिलती है, बल्कि भक्तों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।
श्रद्धालु इसे अत्यंत शुभ मानते हैं और बड़ी संख्या में दर्शन के लिए मंदिर आते हैं। मंदिर की इस परंपरा के अनुसार, इन कलशों पर देश की प्रमुख ग्यारह नदियों के नाम अंकित किए जाते हैं- इनमें गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, सरयू, शिप्रा और गंडकी शामिल हैं।
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इन नदियों का स्मरण, आान और ध्यान मंत्रों के साथ जल-स्थापित कर बाबा महाकाल पर निरंतर शीतल जलधारा अर्पित की जाती है। यह विशेष जलाभिषेक प्रतिदिन सुबह भस्मारती से शुरू होकर सायंकालीन पूजन तक जारी रहता है। यह परंपरा मंदिर की धार्मिक और सांस्वफढतिक पहचान को और सशक्त बनाती है।
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